तेल संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रणनीतिक ऊर्जा रूपरेखा विकसित करने की जरूरत: समिति
तेल संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रणनीतिक ऊर्जा रूपरेखा विकसित करने की जरूरत: समिति
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने मंगलवार को सुझाव दिया कि आर्थिक मामलों के विभाग को कच्चे तेल के संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक ऊर्जा रूपरेखा विकसित करनी चाहिए।
इसके अलावा, वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक ईंधन के विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ खनिज तत्वों के लिए तेजी से विकसित हो रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता है।
वरिष्ठ भाजपा नेता भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने सिफारिश की है कि सरकार लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ खनिज तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विविध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के प्रयासों में तेजी लाए। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों सहित उभरते क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए घरेलू खोज, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमताओं को मजबूत करे।
निवेश के संबंध में, समिति ने सिफारिश की है कि वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को वैश्विक नरमी के रुख का मुकाबला करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बना रहे, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियामकीय रूपरेखा को सुव्यवस्थित करना चाहिए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए, इस रूपरेखा में क्षेत्र-विशेष के लिए प्रोत्साहन शामिल होने चाहिए। इनमें एक ही जगह सभी प्रकार की मंजूरी, उच्च-मूल्य वाले विनिर्माण और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी परियोजनाओं के लिए तेजी से मंजूरी और लक्षित अनुसंधान एवं विकास से जुड़े राजकोषीय लाभ शामिल हैं।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि विभाग राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान व्यवस्था से हटने में मदद करने के लिए एक ‘संरचनात्मक सुधार सेतु’ की सुविधा प्रदान करे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें राजकोषीय लोकलुभावन योजनाओं को हतोत्साहित करने के लिए एक व्यवस्था शामिल होनी चाहिए। इसके तहत ‘पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता’ को राजस्व व्यय को युक्तिसंगत बनाने से जोड़ा जा सकता है।
समिति ने दीर्घकालिक बॉन्ड के पुनर्भुगतान को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करने के लिए एक अधिक औपचारिक ‘सिंकिंग फंड’ की स्थापना की भी सिफारिश की।
सिंकिंग फंड अलग से बनाया गया कोष होता है, जिसे भविष्य में होने वाले किसी महत्वपूर्ण खर्च को पूरा करने या ऋण चुकाने के लिए एक निश्चित अवधि में जमा किया जाता है।
भाषा रमण अजय
अजय

Facebook


