नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने मंगलवार को कहा कि फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देकर रासायनिक उर्वरक की खपत कम करने की जरूरत है।
उन्होंने उद्योग मंडल फिक्की के ‘इंडिया इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।
देव ने कहा कि कृषि क्षेत्र को और अधिक विविध, पौष्टिक, टिकाऊ और जलवायु के अनुकूल बनाने की जरूरत है।
ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ फसल कटाई के बाद की गतिविधियों और विपणन को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
उर्वरक की अधिक खपत के बारे में देव ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति की समस्याएं पैदा हुईं और सब्सिडी बढ़ गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह है कि यूरिया की वैश्विक कीमतें तेजी से कम हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।’’
देश ने पिछले वित्त वर्ष में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था।
देव ने कहा कि कई राज्य और जिले ऐसे हैं जहां प्रति हेक्टेयर बहुत अधिक मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बाजरा, दाल और तिलहन जैसी कम उर्वरक वाली फसलों को अपनाकर खाद का उपयोग कम किया जा सकता है।’’ साथ ही, उन्होंने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती का हिस्सा बढ़ना चाहिए।
देव ने कहा कि भारत के उर्वरक क्षेत्र में किए गए सुधार सही दिशा में हैं।
उन्होंने इन सुधारों का उल्लेख किया, जिनमें नीम-कोटेड यूरिया की बिक्री, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नैनो-यूरिया, प्राकृतिक खेती की पहल और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी प्रणाली शामिल हैं।
ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा, ‘‘अगले कदम के तौर पर हमें राष्ट्रीय पोषक तत्व उपयोग दक्षता पहल पर विचार करना चाहिए, जो हमारा ध्यान उर्वरक की खपत की मात्रा से हटाकर उससे मिलने वाली उत्पादकता पर केंद्रित करे।’’
देव ने कहा कि ऐसा जिला-स्तर पर दक्षता मानक, फसल-वार पोषक तत्व उत्पादकता लक्ष्य और नतीजों से जुड़े प्रोत्साहन अनुदान के जरिये किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एग्रीस्टैक, सैटेलाइट मैपिंग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पीएम-किसान डेटा और डिजिटल जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके वैज्ञानिक रूप से निर्धारित प्रति-एकड़ पोषक तत्व बजट बना सकते हैं।’’
देव ने कार्बन क्रेडिट की तर्ज पर ‘पोषक क्रेडिट प्रणाली’ बनाने का भी सुझाव दिया।
उन्होंने मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने की बात कही, जिसमें कम्पोस्ट, फसल-अवशेष प्रबंधन, हरी खाद, कृषि वानिकी और पशुधन से जुड़े पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण जैसे उपाय शामिल हों।
चेयरमैन ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि भविष्य में उत्पादकता में बढ़ोतरी नाइट्रोजन के अधिक इस्तेमाल के बजाय मिट्टी के जीवविज्ञान से ज्यादा होगी।’’
देव ने भारतीय खेती को न सिर्फ दुनिया में सबसे अधिक उत्पादक बनाने, बल्कि उसे सबसे ज्यादा पोषण देने वाला और फसल को पोषक तत्व प्रदान करने वाला बनाने का भी आह्वान किया।
भाषा रमण अजय
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