ढाका, 23 जून (भाषा) बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ के दर्जनों कार्यकर्ताओं को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया। ये कार्यकर्ता देशव्यापी सुरक्षा प्रतिबंध के बावजूद पार्टी का 77वां स्थापना दिवस मनाने के लिए जगह-जगह सड़कों पर मार्च कर रहे थे। अधिकारियों ने मंगलवार यह जानकारी दी।
तेईस जून 1949 को स्थापित अवामी लीग देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है। उस समय आज का बांग्लादेश ‘पूर्वी पाकिस्तान’ हुआ करता था। इसी पार्टी ने 1971 में देश के मुक्ति संग्राम का नेतृत्व किया था।
‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से मशहूर छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद पांच अगस्त 2024 को हसीना सरकार गिर गई थी। इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पार्टी को भंग कर दिया था। बाद में, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के तहत संसद ने भी इस फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी।
अवामी लीग ने अपने सोशल मीडिया मंच के जरिये समर्थकों से अपील की कि वे इस स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल मंच के जरिये चर्चा करें, पार्टी के झंडे फहराएं, जुलूस निकालें और पोस्टर अभियान चलाएं।
पुलिस मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि सिर्फ़ ढाका में ही इस ‘‘प्रतिबंधित’’ पार्टी के 26 कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया, जबकि देश के अन्य हिस्सों में जुलूस निकालने या कड़ी सुरक्षा के बीच प्रतिबंध के उल्लंघन की कोशिश करने पर कई अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया।
ढाका महानगर पुलिस (डीएमपी) आयुक्त मोसलेह उद्दीन अहमद ने एक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘हमने अब तक उनकी योजना को नाकाम कर दिया है, और मुझे उम्मीद है कि बचे हुए समय में वे कोई जुलूस नहीं निकाल पाएंगे, रैली नहीं कर पाएंगे या कहीं भी इकट्ठा नहीं हो पाएंगे।’’
बाद में डीएमपी ने एक बयान में कहा कि गिरफ़्तार किए गए लोगों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई चल रही है और राजधानी में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभियान जारी रहेंगे।
प्रतिबंधों के बावजूद, अवामी लीग के सोशल मीडिया मंच पर वीडियो क्लिप अपलोड किए गए, जिनमें पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर मार्च करते, पार्टी के झंडे और बैनर लिये हुए और नारे लगाते हुए दिखाया गया।
स्थापना दिवस से ठीक पहले, शेख हसीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हम हारने के लिए पैदा नहीं हुए हैं।’’
वर्ष 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं। छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को दबाने की कोशिशों से जुड़े आरोपों के कारण बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें (हसीना को) उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई थी।
अवामी लीग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हम लोगों के समर्थन और 10 गुना ज़्यादा ताकत के साथ वापसी कर रहे हैं।’’
बांग्लादेश के मुख्यधारा की मीडिया और ऑनलाइन न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म पर हसीना के बयानों या अवामी लीग की गतिविधियों को छापने या प्रसारित करने पर रोक है।
हालांकि, क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में छपी टिप्पणियों में हसीना ने दूसरे दलों की सरकारों पर न्यायपालिका का राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने, ‘‘भीड़ आतंक’’ को बढ़ावा देने और चुनाव के माहौल को ‘‘हास्यापद’’ बनाने का आरोप लगाया है।
ऐसी खबर है कि बारिशाल ज़िले में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने बिना इजाज़त अचानक जुलूस निकाले, जिसके बाद अधिकारियों को दंगा-रोधी साज़ो-सामान से लैस अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
मीडिया की खबरों के मुताबिक, गोपालगंज में भी सेना तैनात की गई है। यह इलाका अवामी लीग का पारंपरिक गढ़ रहा है और यहीं 2024 में ‘जुलाई विद्रोह’ के नेताओं द्वारा आयोजित एक मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में पांच प्रदर्शनकारी मारे गए थे। इन नेताओं ने बाद में युवाओं के नेतृत्व वाली ‘नेशनल सिटिज़न पार्टी’ (एनसीपी) बनाई थी।
गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सोमवार को कहा कि अवामी लीग अब एक (राजनीतिक) संगठन के तौर पर मौजूद नहीं है।
पार्टी के स्थापना दिवस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘अवामी लीग नाम का कोई संगठन नहीं है।’’
उसी दिन, सरकार ने नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सेना और अर्द्धसैनिक बल ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ (बीजीबी) के जवानों को तैनात किया।
यह कदम स्थापना दिवस के जश्न और अवामी लीग के दो कार्यकर्ताओं की मौत की खबरों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए उठाया गया।
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि 30 जून तक ढाका और पांच अन्य जिलों में सेना और बीजीबी के जवानों को तैनात किया गया है। इन जिलों में दक्षिण-पश्चिम में स्थित गोपालगंज भी शामिल है, जो शेख हसीना का गृह नगर है।
अधिकारियों ने पहले ही देश भर में सुरक्षा चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी खुफिया जानकारी के आधार पर जारी की गयी थी कि अवामी लीग के समर्थक 23 जून के स्थापना दिवस के आसपास अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं।
अवामी लीग के दो कार्यकर्ताओं की मौत के बाद तनाव बढ़ गया। इनमें से एक की मौत 20 जून को फरीदपुर में पुलिस हिरासत में हुई, जबकि दूसरे की मौत 21 जून को बारिशाल में पुलिस द्वारा पीछा किए जाने की वजह से लगी चोटों के कारण हुई।
इन घटनाओं के कारण स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसमें ढाका को दक्षिण-पश्चिमी शहर खुलना से जोड़ने वाले एक मुख्य राजमार्ग को कुछ समय के लिए जाम करना भी शामिल था।
भाषा सुरेश दिलीप
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