नए एफटीए भारत में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में निवेश के लिए भरोसा देते हैं: वाणिज्य सचिव

नए एफटीए भारत में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में निवेश के लिए भरोसा देते हैं: वाणिज्य सचिव

नए एफटीए भारत में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में निवेश के लिए भरोसा देते हैं: वाणिज्य सचिव
Modified Date: September 24, 2026 / 05:55 pm IST
Published Date: September 24, 2026 5:55 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने पिछले पांच-छह वर्षों में जिन नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को अंतिम रूप दिया है, उन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत में निवेश करने के इच्छुक दीर्घकालिक निवेशकों को भरोसा मिल सके।

उन्होंने कहा कि ये समझौते भारत में रहकर 60 हजार अरब अमेरिकी डॉलर के बाजार तक पहुंच भी उपलब्ध कराते हैं।

अग्रवाल ने यहां पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘पिछले पांच-छह साल में हमने जिन नए और आधुनिक एफटीए को देखा है, वे सभी इस तरह तैयार किए गए हैं कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत में निवेश करने वाले दीर्घकालिक निवेशकों को भरोसा मिले।’’

उन्होंने कहा कि निवेश के लिए अनुकूल माहौल जरूरी है और एफटीए शुल्क के मामले में यह उपलब्ध कराते हैं।

भारत ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है।

भारत को ईएफटीए के साथ व्यापार समझौते के तहत 15 साल में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की प्रतिबद्धता मिली है। न्यूजीलैंड ने भी इस समझौते के तहत भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

उन्होंने कहा कि ये व्यापार समझौते निर्यात के उत्पादों और बाजारों में विविधता लाने में भी मदद करते हैं।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘जब आप अपनी निर्यात आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाते हैं और आपका बाजार व्यापक होता है, तो जोखिम कम होता है। मुक्त व्यापार समझौते ऐसा माहौल तैयार करते हैं जिससे हमारी निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिम को भी कम किया जा सके।’’

सचिव ने कहा कि आज कोई निर्यातक आसियान क्षेत्र के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के बाजारों तक पहुंच बना सकता है।

उन्होंने कहा कि शुल्क में अंतर का लाभ उठाने से निर्यात में विविधता लाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं एक ही उत्पाद को 10 बाजारों में पहुंचा रहा हूं तो मेरा जोखिम कम हो रहा है। इस तरह निर्यात के जोखिम को कम किया जा सकता है और निर्यात में टिकाऊ वृद्धि के लिए यह महत्वपूर्ण है।’’

भाषा योगेश अजय

अजय


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