नया आयकर कानून आधुनिक, पारदर्शी कर प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम: राष्ट्रपति

नया आयकर कानून आधुनिक, पारदर्शी कर प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम: राष्ट्रपति

नया आयकर कानून आधुनिक, पारदर्शी कर प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम: राष्ट्रपति
Modified Date: April 15, 2026 / 07:48 pm IST
Published Date: April 15, 2026 7:48 pm IST

नागपुर, 15 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि आयकर अधिनियम, 2025, जो एक अप्रैल से लागू हुआ है, एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी कर प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

वह यहां राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) में भारतीय राजस्व सेवा के 78वें बैच के समापन समारोह में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रही थीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और ऐसे समय में प्रशासनिक व्यवस्था और उससे जुड़े हर संस्थान की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय विचारक कौटिल्य ने अपने ग्रंथ अर्थशास्त्र में शासन का एक शाश्वत सिद्धांत दिया था कि जिस प्रकार एक मधुमक्खी फूलों को नुकसान पहुंचाए बिना उनसे शहद इकट्ठा करती है, उसी प्रकार एक शासक को लोगों पर अनावश्यक बोझ डाले बिना कर एकत्र करना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने आगे कहा कि यह हमें सिखाता है कि कराधान केवल राजस्व संग्रह का साधन नहीं है, बल्कि राज्य और नागरिकों के बीच विश्वास का एक सेतु भी है। उन्होंने कहा कि कर प्रणाली प्रभावी, न्यायपूर्ण, संवेदनशील और संतुलित होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा अत्यंत गतिशील और प्रेरणादायक रही है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर वृद्धि, कर अनुपालन में सुधार और कर आधार का विस्तार नागरिकों और प्रशासन के बीच बढ़ते विश्वास का संकेत देता है।

मुर्मू ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025, जो एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी है, इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने आगे जोड़ा कि यह एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी कर प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशिक्षु आईआरएस अधिकारी इस नए कानून को लागू करने में अग्रणी होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी वास्तविक सफलता केवल इसके सही, पारदर्शी और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से सुनिश्चित होगी और यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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