एनएफआरए ने क्वेस कॉर्प मामले में पेशेवर कदाचार के लिए ऑडिटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

एनएफआरए ने क्वेस कॉर्प मामले में पेशेवर कदाचार के लिए ऑडिटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

एनएफआरए ने क्वेस कॉर्प मामले में पेशेवर कदाचार के लिए ऑडिटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
Modified Date: January 4, 2024 / 10:18 pm IST
Published Date: January 4, 2024 10:18 pm IST

नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) ने क्वेस कॉर्प लिमिटेड के मामले में वित्त वर्ष 2018-19 से 2020-21 के लिए पेशेवर कदाचार का दोषी पाए गए ऑडिटर (लेखाकार) पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयकर महानिदेशक (जांच), बेंगलुरु, ने अगस्त 2022 में 2016-17, 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए दो चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी फॉर्म 10डीए के आधार पर क्वेस द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80जेजेएए के तहत कुल 1,135.41 करोड़ रुपये की कटौती के दावे के बारे में जानकारी साझा की थी।

आयकर अधिनियम की धारा 80जेजेएए पात्र उद्यमों को एक मूल्यांकन वर्ष के दौरान अतिरिक्त कर्मचारी लागत के खिलाफ कटौती का दावा करने की अनुमति देती है।

एनएफआरए ने इसके बाद उक्त प्रमाणीकरण में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट और उनकी फर्मों के पेशेवर आचरण की जांच करने के लिए कार्रवाई शुरू की थी।

बुधवार को पारित अपने आदेश में एनएफआरए ने कहा कि ऑडिटर पवन जैन, आयकर अधिनियम के तहत रिपोर्ट जारी करने से पहले उचित जांच-परख करने और पर्याप्त जानकारी प्राप्त करने में विफल रहे।

एनएफआरए ने कहा कि जैन आवश्यक जांच लागू करने में विफल रहे। इन जांचों में विभिन्न पक्षों के साथ व्यवसाय के पुनर्गठन को सत्यापित करना और उन कर्मचारियों को बाहर करना शामिल है, जिनका कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) योगदान का भुगतान सरकार द्वारा किया गया था।

एनएफआरए ने कहा कि वह वित्त वर्ष 2020-21 में अतिरिक्त कर्मचारियों की संख्या की सही रिपोर्ट करने में भी विफल रहे।

भाषा अनुराग अजय

अजय


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