आत्मनिर्भर भारत की आलोचना को लेकर नीति आयोग उपाध्यक्ष का सुब्रमणियम पर पलटवार

आत्मनिर्भर भारत की आलोचना को लेकर नीति आयोग उपाध्यक्ष का सुब्रमणियम पर पलटवार

आत्मनिर्भर भारत की आलोचना को लेकर नीति आयोग उपाध्यक्ष का सुब्रमणियम पर पलटवार
Modified Date: November 29, 2022 / 08:18 pm IST
Published Date: October 14, 2020 2:34 pm IST

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बुधवार को पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमणियम के आत्मनिर्भर भारत पहल की आलोचना करने को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सुब्रमणियम के सीईए पद पर रहने के दौरान ही प्रभावी रूप से उसकी शुरूआत हुई थी, तब उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा था।

सुब्रमणियम ने एक शोध पत्र में सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि भारत को घरेलू बाजार को लेकर गुमराह करने वाले प्रलोभन से बचना चाहिए और पूरी शक्ति के साथ निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने यह शोध पत्र पेंसिलवेनिया स्टेट यूनवर्सिटी के प्रोफेसर सुमित्रो चटर्जी के साथ मिलकर लिखा है।

कुमार ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘अरविंद सुब्रमणियम के अन्य के साथ मिलकर लिखे गये शोध पत्र में आत्मनिर्भर अभियान की आलोचना को को देखकर हैरान हूं। यह प्रभावी रूप से उस समय शुरू हुआ था जब सुब्रमणियम मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। वर्ष 2018 में आयात शुल्कों में सर्वाधिक वृद्धि हुई थी और यह करीब 18 प्रतिशत हो गयी थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप सरकार में होते हैं तो अलग रुख और बाहर होते हैं तब अलग विचार। यह ठीक नहीं है, ईमानदार रुख नहीं है।’’

सुब्रमणियम ने मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में मोदी की अगुवाई वाली सरकार से अक्टूबर 2014 में जुड़े थे। उनका कार्यकाल तीन साल के लिये था, जिसे बाद में एक साल के लिये बढ़ाया गया।

हालांकि उन्होंने विस्तारित कार्यकाल पूरा नहीं किया और निजी कारणों से अमेरिका लौट गये। फिलहाल वह अशोक यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।

शोध पत्र में उन्होंने लिखा है कि भारत आत्मकेंद्रित हो रहा है। घरेलू मांग, निर्यात से ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है तथा व्यापार पाबंदियां बढ़ रही हैं। तीन दशक से जारी (बाह्य उदारीकरण की) प्रवृत्ति पलट रही है।

पत्र के अनुसार, ‘‘भारत को घरेलू बाजार को लेकर गुमराह करने वाले प्रलोभन से बचना चाहिए और पूरी शक्ति से निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए और इसे हासिल करने के लिये सभी उपाय करने चाहिए।’’

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर


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