कंपनियों के बोर्ड में महिला निदेशकों की संख्या अब भी कम : अरुंधति भट्टाचार्य

कंपनियों के बोर्ड में महिला निदेशकों की संख्या अब भी कम : अरुंधति भट्टाचार्य

कंपनियों के बोर्ड में महिला निदेशकों की संख्या अब भी कम : अरुंधति भट्टाचार्य
Modified Date: September 10, 2026 / 06:55 pm IST
Published Date: September 10, 2026 6:55 pm IST

मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) सेल्सफोर्स दक्षिण एशिया की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अरुंधति भट्टाचार्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि कंपनियों के निदेशक मंडल यानी बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब भी केवल न्यूनतम अनुपालन स्तर तक सीमित है, इसलिए लैंगिक समानता बढ़ाने के लिए सकारात्मक पहल जरूरी है।

उन्होंने यह भी आगाह किया कि कृत्रिम मेधा (एआई) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल मौजूदा लैंगिक भेदभाव को और गहरा कर सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पूर्व चेयरपर्सन भट्टाचार्य ने ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में कहा कि नियामकीय प्रावधानों की वजह से कंपनियों के निदेशक मंडल में महिलाओं का प्रवेश हुआ। शुरुआत में यह परिवार के सदस्यों के जरिये हुआ और बाद में स्वतंत्र निदेशकों के रूप में महिलाएं शामिल हुईं। हालांकि, ज्यादातर कंपनियां अब भी एक महिला निदेशक की नियुक्ति से आगे नहीं बढ़ पाई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैं इसके लिए बहुत अधिक ‘प्रोत्साहन’ के पक्ष में हूं, लेकिन जब आपने हर प्रयास कर लिया हो और फिर भी लक्ष्य हासिल नहीं हुआ हो, तो यह पहल जरूरी हो जाती है।’’

भट्टाचार्य ने उभरती प्रौद्योगिकी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि एआई में उपलब्ध आंकड़ों की कमी के कारण लैंगिक असमानता बढ़ने का जोखिम है।

उन्होंने कहा, ‘‘लैंगिक भेदभाव बढ़ने का जोखिम है, क्योंकि एआई उपलब्ध सामग्री के आधार पर काम करता है और उसी से सीखता है। महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने से जुड़ी उपलब्ध सामग्री पुरुषों की तुलना में काफी कम है। इसलिए रुझान स्वाभाविक रूप से उसी दिशा में जा सकते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतनी होगी कि इस्तेमाल किए जा रहे मॉडल में पूर्वाग्रह न आए।’’

उन्होंने घरों के भीतर डिजिटल असमानता का भी उल्लेख किया, जो महिलाओं को आधुनिक डिजिटल उपकरणों और जनरेटिव एआई मंचो तक पहुंचने में बाधा डालती है। उन्होंने कहा कि निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों में अक्सर महिलाओं को सबसे आखिर में मोबाइल फोन मिलता है और उन्हें कई बार पुराने या इस्तेमाल किए हुए उपकरण ही दिए जाते हैं।

भाषा

यासिर अजय

अजय


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