सरकारी कंपनी की परिभाषा बदलने, निजीकरण के लिए ओएफएस का सुझाव: आर्थिक समीक्षा

सरकारी कंपनी की परिभाषा बदलने, निजीकरण के लिए ओएफएस का सुझाव: आर्थिक समीक्षा

सरकारी कंपनी की परिभाषा बदलने, निजीकरण के लिए ओएफएस का सुझाव: आर्थिक समीक्षा
Modified Date: January 29, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: January 29, 2026 8:23 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा में एक क्रांतिकारी बदलाव की सिफारिश की गई है। इसके अनुसार सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की परिभाषा में संशोधन करने पर विचार करना चाहिए और न्यूनतम हिस्सेदारी की सीमा को मौजूदा 51 प्रतिशत से घटाकर 26 प्रतिशत कर देना चाहिए।

यह सुझाव इस आधार पर दिया गया है कि 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भी प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जा सकता है। आमतौर पर इतनी हिस्सेदारी महत्वपूर्ण फैसलों को प्रभावित करने के लिए ‘विशेष प्रस्ताव अधिकार’ देती है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई इस समीक्षा में कहा गया कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) का निजीकरण किया जाना है, उनके लिए सरकारी कंपनी की कानूनी परिभाषा को बदले बिना भी हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से नीचे लाने और पूर्ण निकास की दिशा में चरणबद्ध तरीके से बढ़ा जा सकता है। इसके लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) लाने का सुझाव दिया गया।

वर्ष 2016 से अब तक 36 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के रणनीतिक विनिवेश या निजीकरण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इनमें से 13 सौदे पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।

लगभग 30 प्रतिशत सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी पहले ही 60 प्रतिशत से नीचे है। इस समय कंपनी कानून के अनुसार सरकारी कंपनी कहलाने के लिए कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र या राज्य सरकार के पास होनी चाहिए। यह सीमा ओएफएस के जरिये आगे विनिवेश की गुंजाइश को कम करती है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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