नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में युद्ध का संकट बने रहने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सरसों मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, पाम एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतों में मजबूती देखी गई।
मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में मजबूती का रुख है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले पश्चिम एशिया में ईरान तथा अमेरिका एवं इजराइल युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीद जतायी थी जिसके बाद संकट टलने की उम्मीद में मंगलवार को मंडियों में गिरावट आई थी। लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने के बीच बाजार में असमंजस की स्थिति है। युद्धरत देशों के बीच तनाव बना हुआ है और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में बुधवार को फिर से खाद्य तेल-तिलहनों के दाम मजबूत हो गये।
उन्होंने कहा कि सरसों और सोयाबीन के किसान नीचे भाव में अपना माल नहीं बेचना चाहते हैं। ऐसे में बाजार में उपलब्धता कम है। मंडियों में किसानों को इन दोनों ही तिलहनों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास मिल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर, सूरजमुखी, कपास नरमा (जिससे बिनौला निकलता है) और मूंगफली के दाम एमएसपी से नीचे चल रहे हैं। कपास नरमा का भाव एमएसपी से लगभग 10 प्रतिशत नीचे है। इस वजह से मंडियों में नरमा की आवक भी कम है। बुधवार को कपास नरमा की आवक मंगलवार के लगभग एक लाख गांठ से घटकर लगभग 80 हजार गांठ रह गई।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए प्रतीत होता है कि सरकार को सरसों की खरीद का मौका नहीं मिल पायेगा। अगर मंडियों में किसान को एमएसपी से थोड़ा बहुत कम दाम भी मिले तो वे सरकार के बजाय मंडियों में बेचना पसंद करते हैं। सरकारी खरीद होने पर उन्हें मंडी में जाने के लिए प्रवेश पत्र, कागजातों पर अंगूठे का निशान लगाने, नमी वाली फसलों की जांच, बाकी अन्य कागजी कार्रवाई इत्यादि जैसी तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने लिए समय लगाना पड़ता है जो दिक्कत उन्हें मंडियों में नहीं आती।
उन्होंने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज मजबूत रहने से पाम-पामोलीन तेल के दाम में भी पर्याप्त सुधार आया। सूरजमुखी और मूंगफली के महंगा होने से बिनौला तेल के दाम में भी पर्याप्त सुधार देखा गया।
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा नाजुक दौर में तेल-तिलहन के संबंध में किसी जिम्मेदार संगठन के पदाधिकारी को ही उपलब्धता के संदर्भ में कोई सार्वजनिक टिप्पणी करनी चाहिये। तेल संगठनों के पदाधिकारियों से अलग किसी अन्य के बयान से सट्टेबाजी को बल मिल सकता है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,725-6,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 7,000-7,475 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,875 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,670-2,970 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,350-2,450 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,350-2,495 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,750 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 13,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,900 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 13,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,650-5,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,250-5,300 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय