भारतीय कंपनियों का अप्रैल में विदेशों में निवेश दोगुना होकर 3.36 अरब डॉलर पर
भारतीय कंपनियों का अप्रैल में विदेशों में निवेश दोगुना होकर 3.36 अरब डॉलर पर
मुंबई, 21 मई (भाषा) भारतीय कंपनियों का दूसरे देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) अप्रैल में इससे पिछले महीने की तुलना में दोगुना होकर 3.36 अरब डॉलर से अधिक रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव और रुपये में तेज गिरावट के बावजूद भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कोफोर्ज के निवेश के कारण हुई।
आरबीआई के अनुसार, मार्च में भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश 1.61 अरब डॉलर था, जबकि एक साल पहले अप्रैल, 2025 में यह 1.96 अरब डॉलर रहा था।
अप्रैल, 2026 में शीर्ष पांच कंपनियों की हिस्सेदारी इक्विटी के जरिये कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में करीब 86 प्रतिशत रही। इसमें कोफोर्ज के दो निवेश सौदे शामिल हैं, जिनकी राशि क्रमश: 1.37 अरब डॉलर और 99.4 करोड़ डॉलर रही।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कोफोर्ज के बाद ल्यूपिन का निवेश 22.9 करोड़ डॉलर, विंगिफाई सॉफ्टवेयर का 15.68 करोड़ डॉलर, नैक ग्लोबल का 8.29 करोड़ डॉलर और क्लार टेक्नोलॉजी इंडिया का 5.40 करोड़ डॉलर रहा।
बॉन्ड और गारंटी सहित कुल वित्तीय प्रतिबद्धता अप्रैल में मासिक आधार पर केवल 11 प्रतिशत बढ़कर 5.64 अरब डॉलर रही, जो इससे पिछले महीने (मार्च) में 5.08 अरब डॉलर थी। हालांकि, सालाना आधार पर कुल वित्तीय प्रतिबद्धता में 10.81 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो अप्रैल, 2025 में 6.329 अरब डॉलर थी।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कुल वित्तीय प्रतिबद्धता में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इक्विटी निवेश में आया भारी उछाल रहा। दूसरी ओर, पिछले महीने की तुलना में बॉन्ड और गारंटी के मामलों में गिरावट देखी गई।
अप्रैल, 2026 में बॉन्ड प्रतिबद्धताएं घटकर 51.77 करोड़ डॉलर रह गईं, जो मार्च में 77.06 करोड़ डॉलर और अप्रैल, 2025 में 1.121 अरब डॉलर थीं।
अप्रैल में जारी गारंटी का मूल्य 1.75 अरब डॉलर रहा, जबकि मार्च में यह 2.701 अरब डॉलर और अप्रैल, 2025 में 3.23 अरब डॉलर था।
भाषा योगेश अजय
अजय

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