पेटीएम ने एनबीएफसी लाइसेंस लेने की योजना से इनकार किया

पेटीएम ने एनबीएफसी लाइसेंस लेने की योजना से इनकार किया

पेटीएम ने एनबीएफसी लाइसेंस लेने की योजना से इनकार किया
Modified Date: May 7, 2026 / 12:24 pm IST
Published Date: May 7, 2026 12:24 pm IST

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी प्रमुख वन97 कम्युनिकेशंस ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) लाइसेंस के लिए आवेदन करने की योजना से इनकार किया है।

वन97 कम्युनिकेशंस के पास पेटीएम ब्रांड का स्वामित्व है।

कंपनी का चौथी तिमाही का आय संबंधी विवरण देते हुए पेटीएम के अध्यक्ष एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी (समूह) मधुर देवड़ा ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘ हम एनबीएफसी लाइसेंस लेने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा कि पेटीएम की प्राथमिकता ‘‘ दोनों पक्षों के लिए लाभकारी’’ साझेदारी मॉडल की है जिसमें पेटीएम वितरण, प्रौद्योगिकी एवं वसूली का काम संभालता है जबकि उसके प्रतिष्ठित ऋण साझेदार पूंजी, जोखिम एवं चक्रीय उतार-चढ़ाव का प्रबंधन करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे पास भुगतान का बहुत बड़ा बाजार है। यह बाजार बढ़ रहा है और हमारी बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। कम पैठ के साथ मिलकर यह स्थिति अल्प से मध्यम अवधि में बहुत बड़ा अवसर प्रदान करती है।’’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मानदंडों के अनुपालन में विफलता का हवाला देते हुए महीने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ कार्रवाई की थी।

आरबीआई ने कहा था कि बैंक का संचालन उसके जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल तरीके से किया गया।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह बैंक उसे जारी पेमेंट्स बैंक लाइसेंस की शर्तों का पालन करने में विफल रहा।

वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के स्वामित्व वाले, भारत के अग्रणी भुगतान ऐप पेटीएम ने शुक्रवार को शेयर बाजार को भेजी सूचना में स्पष्ट किया था कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) पर भारतीय रिजर्व बैंक की कार्रवाई का कंपनी पर कोई वित्तीय या व्यावसायिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी ने दोहराया कि बैंकिंग इकाई के साथ उसका कोई महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौता या जोखिम नहीं है।

कंपनी ने साथ ही स्पष्ट किया कि उसकी कोई भी सेवा पीपीबीएल से जुड़ी नहीं है और उसकी अनुषंगी कंपनियों सहित सभी पेशकश सामान्य रूप से काम कर रही हैं।

वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का जनवरी-मार्च तिमाही में शुद्ध लाभ 183 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष की इसी अवधि में उसे 545 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में