‘लोकलुभावन के ऊपर लोक’ बना सीतारमण के बजट भाषण का मंत्र

'लोकलुभावन के ऊपर लोक' बना सीतारमण के बजट भाषण का मंत्र

‘लोकलुभावन के ऊपर लोक’ बना सीतारमण के बजट भाषण का मंत्र
Modified Date: February 1, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: February 1, 2026 8:35 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट भाषण ‘लोकलुभावन के ऊपर लोक’ के मंत्र के साथ शुरू हुआ, जो किसी अलंकरण या आख्यान से मुक्त घोषणाओं पर केंद्रित रहा।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सत्ता पाने की दृष्टि से कम दो राज्यों में प्रस्तावित चुनावों को देखते हुए लोकलुभावन घोषणाओं की अपेक्षा की जा रही थी लेकिन सीतारमण ने 85 मिनट लंबा भाषण पूरी शांति के साथ पेश किया।

वित्त मंत्री ने कहा, “विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026” में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष पेश कई नवोन्मेषी विचारों ने इस बजट के प्रस्तावों को प्रेरित किया है जिससे यह एक युवा शक्ति-प्रेरित बजट बन गया।’’

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का ‘संकल्प’ गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों पर केंद्रित है।

उनके भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों की तरफ से कोई विशेष व्यवधान नहीं देखने को मिला।

अपने पिछले बजट भाषणों की तरह तमिल संदर्भों का उल्लेख न करते हुए सीतारमण ने इस बार किसी भी भाषा में काव्य संदर्भों से परहेज किया।

चुनाव से जुड़ा केवल एक ही संकेत देखने को मिला। सीतारमण ने तमिलनाडु की परंपरागत कांचीवरम रेशमी साड़ी पहन रखी थी जहां पर इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

यह पहला बजट था जिसे नवनिर्मित कर्तव्य भवन में तैयार किया गया। पहले यह कार्य नॉर्थ ब्लॉक में स्थित वित्त मंत्रालय के दफ्तर में होता था।

सीतारमण ने अपने भाषण में कहा कि कर्तव्य भवन में तैयार पहले बजट से तीन ‘कर्तव्यों’ की प्रेरणा मिली जो आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाना, आकांक्षाओं को पूरा करना एवं क्षमता का निर्माण और सबका साथ, सबका विकास हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा अनिश्चितता पर कार्रवाई, बयानबाजी पर सुधार और लोकलुभावन घोषणाओं पर लोक को प्राथमिकता दी है।

इस बजट का समापन भी किसी कविता या उद्धरण के बजाय ‘जीवन यापन की सुविधा’ के मुद्दे पर हुआ। उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता अब दंड के बजाय अतिरिक्त राशि देकर मामलों को बंद कर सकेंगे।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण का समापन भी ‘जय हिंद’ के साथ किया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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