वाहन ईंधन के दाम फिर बढ़े, ज्यादातर प्रमुख शहरों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर के पार

वाहन ईंधन के दाम फिर बढ़े, ज्यादातर प्रमुख शहरों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर के पार

वाहन ईंधन के दाम फिर बढ़े, ज्यादातर प्रमुख शहरों में पेट्रोल 100 रुपये लीटर के पार
Modified Date: May 25, 2026 / 09:34 pm IST
Published Date: May 25, 2026 9:34 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) देश में सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी वृद्धि है।

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ उसके खुदरा दाम बढ़ा रही हैं।

इस ताजा बढ़ोतरी के साथ, 15 मई से लेकर पेट्रोल और डीजल के दाम में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। इससे अर्थव्यवस्था में महंगाई और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।

उद्योग सूत्रों के अनुसार, कीमतों में हुए इस ताजा संशोधन में पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है। इससे दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 113.51 रुपये और 99.82 रुपये प्रति लीटर, जबकि चेन्नई में 107.77 रुपये और 99.55 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

इससे पहले, 15 मई को पेट्रोल और डीजल में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर, 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर तथा 23 मई को पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी।

विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर होता है।

इस वृद्धि के बाद, पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई, 2022 के बाद से उच्चतम स्तर पर हैं। ईंधन के दाम में अप्रैल, 2022 से कोई कोई वृद्धि नहीं हुई थी। हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गयी थी। आखिरी बार कीमतों में वृद्धि अप्रैल, 2022 में हुई थी।

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) का कुल मिलकर देश के लगभग 90 प्रतिशत ईंधन बाजार पर नियंत्रण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसका कारण पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति का बाधित होना है।

संघर्ष के शुरुआती ढाई महीनों में पेट्रोलियम कंपनियों ने लागत बढ़ने के बावजूद खुदरा कीमतों को स्थिर रखा था। सरकार ने इसे उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने का कदम बताया था, जबकि विपक्षी दलों ने सरकार पर पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी टालने का आरोप लगाया था।

यह मूल्य वृद्धि 15 मई को तब शुरू हुई, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश के चुनावों में से तीन में जीत दर्ज की।

युद्ध शुरू होने के बाद से, घरेलू खाना पकाने वाली गैस एलपीजी की कीमतों में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 60 रुपये की वृद्धि हुई है। वहीं संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) की कीमतों में मई के मध्य से चार रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है।

कंपनियां कीमतों में वृद्धि के बावजूद, वाहन ईंधन पेट्रोल और डीजल तथा घरेलू खाना पकाने की गैस एलपीजी लागत से कम दाम पर बेच रही हैं।

सार्वजनिक कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने के तुरंत बाद नायरा एनर्जी जैसी निजी तेल कंपनियों ने भी इसी अनुपात में दाम बढ़ा दिए। इससे पहले मार्च में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल पर पांच रुपये और डीजल पर तीन रुपये तथा शेल ने एक अप्रैल से पेट्रोल पर 7.41 रुपये और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी के संयुक्त उद्यम ‘जियो-बीपी’ ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के समान ही अपनी दरें बढ़ाई हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि घाटा प्रतिदिन लगभग 600 करोड़ रुपये तक कम हो गया है। यह 15 मई से पहले 1,000 करोड़ रुपये था।

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि हाल के मूल्य संशोधन इस तरह से किए गए हैं कि पेट्रोलियम कंपनियों पर दबाव कुछ हद तक कम हो, लेकिन इससे महंगाई में तेज झटका न लगे। हालांकि, इन बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘‘खुदरा ईंधन की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोलियम विपणन कंपनियों का घाटा लगातार ऊंचा बना हुआ है, क्योंकि घरेलू एलपीजी बिक्री में नुकसान बढ़ रहा है और कच्चे तेल के दाम भी अधिक है।’’

इक्रा ने अनुमान जताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है और पिछले 10 वर्षों के औसत शोधन मार्जिन को ध्यान में रखा जाए, तो विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 700 से 800 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, भले ही हाल की कीमत बढ़ोतरी को शामिल कर लिया जाए।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘यह उच्च स्तर का घाटा लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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