कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल, डीजल के महंगा होने की संभावना नहीं
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल, डीजल के महंगा होने की संभावना नहीं
नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और तेहरान के जवाबी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग नौ प्रतिशत चढ़ गई हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में निकट भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी-कारोबार वाला कच्चा तेल 8.6 प्रतिशत बढ़कर 72.79 डॉलर हो गया है, जो शुक्रवार को लगभग 67 अमेरिकी डॉलर था।
भारत के लिए, जो कच्चे तेल की अपनी आवश्यकता का 88 प्रतिशत आयात करता है, उच्च वैश्विक कीमतें बड़े आयात खर्च और संभावित मुद्रास्फीतिक दबाव में तब्दील हो जाती हैं।
सूत्रों ने कहा कि हालांकि, खुदरा ईंधन की कीमतें तुरंत बढ़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि सरकार कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर मार्जिन बनाने की अनुमति देती है और दरें बढ़ने पर उपभोक्ताओं को राहत देने की एक सुविचारित नीति का पालन कर रही है।
पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल, 2022 से स्थिर बनी हुई हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) जैसी पेट्रोलियम कंपनियां कीमतें अधिक होने पर घाटे को वहन कर रही हैं दरें कम होने पर मुनाफा कमा रही हैं।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण, सरकार ऐसा कुछ नहीं चाहती जिसका विपक्ष फायदा उठा सके।
पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष बढ़ने के बीच, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को अपने मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर स्थिति की समीक्षा की।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरतें आयात से पूरी करता है। ये ज़्यादातर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आते हैं, जिसे ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद बंद करने की धमकी दी है।
मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘हम उभरती स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे।’’
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद, ईरान ने जलडमरूमध्य से दूर पोत परिवहन ना करने की चेतावनी दी है और बीमा कंपनियों ने बीमा कवच वापस ले लिया है, जिससे टैंकर की आवाजाही प्रभावी रूप से रुक गई है।
भारत – दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और- अपनी तेल जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा संकीर्ण जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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