Petrol Pump Close News Today: पेट्रोल पंप पर नहीं मिल रहा पेट्रोल-डीजल, बंद होने की कगार पर कई फिलिंग पॉइंट, वाहनों की लंबी कतार / Image: AI Generated
बिजनेस: Petrol Pump Close News Today अमेरिका और ईरान के बीच जारी आर्थिक नाकेबंदी का असर अब ईरान की जनता पर दिखने लगा है। यहां पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों के बाहर पब्लिक की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल-डीजल की किल्लत और कीमत बढ़ने की खबर सामने आने के बाद हडकंप मचा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हालात ऐसे हैं कि कई पेट्रोल पंप बंद होने की कगार पर आ गए हैं। बताया जा रहा है कि देश में करीब डेली 1.5 करोड़ लीटर पेट्रोल की कमी पड़ रही है।
Petrol Pump Close News Today मिली जानकारी के अनुसार ईरान में पेट्रोल की कमी से सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ईरान रोज करीब 12 करोड़ लीटर पेट्रोल का उत्पादन करता है, जबकि खपत करीब 13.5 करोड़ लीटर है। यानी रोजाना 1.4-1.5 करोड़ लीटर की कमी है। पहले इस कमी का करीब आधा हिस्सा आयात से पूरा होता था, जिसमें रूस से मिलने वाली ईंधन सप्लाई भी शामिल थीं लेकिन अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी, रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों और कैस्पियन सागर के रास्ते की सप्लाई बंद होने से आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ईरान के सहयोगी देशों और पड़ोसियों से वैकल्पिक ईंधन सप्लाई हासिल करने की कोशिशें भी अभी तक सफल नहीं हुई हैं।
पेट्रोल-डीजल की किल्लत को देखते हुए फेरीदून यासेमी ने कहा कि सोमवार को तेहरान में 26 मिलियन लीटर से ज्यादा पेट्रोल बांटा गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान के साथ बिजनेस करने वाले हर देश को चेतावनी दी कि वे अपने फाइनेंशियल रिश्ते तोड़ दें, नहीं तो उन्हें अमेरिका से बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
पेट्रोल संकट का असर राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में दिख रहा है। कुछ पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं और कई जगह लंबी कतारें लग रही हैं। अधिकारियों ने दूसरे प्रांतों से पेट्रोल मंगाकर तेहरान के कुछ पंप दोबारा खुलवाए हैं, लेकिन दर्जनों पंपों पर बंद होने का खतरा बना हुआ है। पेट्रोल की कमी से Snapp और Tapsi जैसी राइड-हेलिंग सेवाओं का किराया भी बढ़ गया है। एक नागरिक के मुताबिक, Snapp की सामान्य यात्रा का किराया पिछले महीने के 10 लाख रियाल से बढ़कर 32 लाख रियाल हो गया। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर ईंधन की सप्लाई सीमित कर रही है, ताकि आगे पेट्रोल की कीमत बढ़ाने को लेकर लोगों को तैयार किया जा सके।
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