पेट्रोलियम लॉबी वैकल्पिक ईंधन की ओर बदलाव आसानी से नहीं होने देगी: गडकरी
पेट्रोलियम लॉबी वैकल्पिक ईंधन की ओर बदलाव आसानी से नहीं होने देगी: गडकरी
पुणे, छह मार्च (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा कि 22 लाख करोड़ रुपये के ईंधन आयात से जुड़े हितों के कारण पेट्रोलियम लॉबी देश में वैकल्पिक एवं हरित ईंधनों को बढ़ावा देने के प्रयासों का आसानी से समर्थन नहीं करेगी।
गडकरी ने यहां ‘इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी’ (आईएफजीई) के संपीडित बायो-गैस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के कारण पेट्रोलियम लॉबी उनके खिलाफ पूरी ताकत लगा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 12 वर्षों से परिवहन मंत्री रहने के दौरान मैंने सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को देखा है। हरित ईंधन की अर्थव्यवस्था में हमारी एक प्रतिशत भी हिस्सेदारी नहीं है, लेकिन पेट्रोलियम लॉबी पूरी ताकत से मेरे पीछे पड़ी हुई है। साफ है कि बहुत से लोगों के हित जीवाश्म ईंधन के आयात से जुड़े हैं। जब देश का करीब 22 लाख करोड़ रुपये का आयात बिल इससे जुड़ा हो, तो यह लॉबी इतनी आसानी से हरित ईंधन के सपनों को पूरा नहीं होने देगी।’’
उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 86 प्रतिशत आयात करता है और जीवाश्म ईंधन के आयात पर हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की परिवहन व्यवस्था को स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए गैर-प्रदूषणकारी और स्वदेशी ईंधन को बढ़ावा देने सहित कई पहल की गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हरित और वैकल्पिक ईंधन ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे, प्रदूषण कम करेंगे और जीवाश्म ईंधन के आयात बिल को घटाने में मदद करेंगे। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना देश को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाएगा।’’
उन्होंने कहा कि हरित एवं वैकल्पिक ईंधन क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं और आने वाले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कम-से-कम 5,000 कंपनियां काम कर सकती हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की विश्वसनीयता, लागत और गुणवत्ता के मानकों पर प्रतिस्पर्धा अहम होगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हरित ईंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट से यह स्पष्ट हो गया है कि देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के इतर गडकरी ने पुणे क्षेत्र में लगभग 50,000 करोड़ रुपये की लागत वाली प्रमुख परिवहन परियोजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का शिलान्यास एक महीने के भीतर किया जाएगा और अगले चार से पांच वर्षों में इन्हें पूरा करने का लक्ष्य है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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