दवा निर्माण के कच्चे माल की पीएलआई योजना में जून तक 5,210 करोड़ रुपये का निवेश: सरकार
दवा निर्माण के कच्चे माल की पीएलआई योजना में जून तक 5,210 करोड़ रुपये का निवेश: सरकार
नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन’ (पीएलआई) योजना के तहत जून, 2026 तक 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, 2020 में मंजूर इस योजना के तहत 28 सक्रिय औषधि अवयवों (एपीआई) और प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) के निर्माण से जुड़ी 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। योजना के लिए 6,940 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
बयान के मुताबिक, जून 2026 तक योजना के लाभार्थियों ने 3,792.49 करोड़ रुपये की बिक्री की, जिसमें 560.16 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। इस दौरान 5,127 रोजगार के अवसर पैदा हुए।
पीएलआई योजना के तहत पांच नई परियोजनाओं में उत्पादन संयंत्र शुरू किए गए हैं। इनमें एंटीबायोटिक, हृदय रोग की दवाओं और पैरासिटामोल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन शामिल है।
अरबिंदो फार्मा की अनुषंगी लाइफियस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा विशेष आर्थिक क्षेत्र में पेंसिलिन-जी निर्माण के लिए एक संयंत्र स्थापित किया है। इस परियोजना में 2,270.05 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और इसकी सालाना उत्पादन क्षमता 15,000 टन है।
डीपीबी समूह की कंपनी किनवन प्राइवेट लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में किण्वन आधारित पोटैशियम क्लैवुलानेट के निर्माण के लिए सालाना 400 टन क्षमता का संयंत्र स्थापित किया है। इस परियोजना में 504.68 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
मंत्रालय ने कहा कि यह देश में पोटैशियम क्लैवुलानेट के निर्माण का पहला किण्वन आधारित संयंत्र है। इससे 465 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं और अब तक कुल 413 करोड़ रुपये का उत्पादन हो चुका है।
सरकार ने 2021 में दवा क्षेत्र के लिए अलग पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत की दवा विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा अधिक मूल्य वाले दवा उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत कुल 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) हैं। जून, 2026 तक योजना में 46,744 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है, जबकि लक्षित निवेश 17,275 करोड़ रुपये था।
मंत्रालय ने कहा कि जून 2026 तक इस योजना से 1,21,294 रोजगार भी पैदा हुए हैं। लाभार्थी कंपनियों ने प्रदर्शन अवधि शुरू होने के बाद जून 2026 तक कुल 4.02 लाख करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की है। इसमें 2.57 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।
भाषा योगेश प्रेम
प्रेम

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