विदेशों में कमजोरी के रुख से अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट

विदेशों में कमजोरी के रुख से अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट

विदेशों में कमजोरी के रुख से अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट
Modified Date: February 14, 2026 / 08:08 pm IST
Published Date: February 14, 2026 8:08 pm IST

नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, पाम-पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम गिरावट के साथ बंद हुए जबकि सामान्य एवं सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

बाजार सूत्रों के मुताबिक, किसानों में इस बात को लेकर आशंका है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद देश में खाद्यतेल के शुल्क-मुक्त आयात बढ़ने से उनके हितों को चोट पहुंचेगी। हालांकि इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।

सूत्रों ने कहा कि सरसों की नयी फसल कहीं बेहतर है और थोड़ी बहुत मात्रा में यह कुछ मंडियों में भी आनी शुरु हो गई है। इस नई फसल में तेल की मात्रा भी अधिक है। मंडियों में व्यापक पैमाने पर आने के लिए तैयार खड़ी इस फसल को देखते हुए सरसों की बड़ी तेल मिलों ने पिछले दो दिनों में सरसों तिलहन के दाम 200-250 रुपये क्विंटल तक घटाये हैं। इन वजहों से सरसों तेल तिलहन के दाम में गिरावट आई।

उन्होंने कहा कि विदेशों में गिरावट का रुख रहने के बीच सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम भी गिरावट के साथ बंद हुए। शिकागो एक्सचेंज में शुक्रवार की रात गिरावट रहने से सोयाबीन संयंत्र वाले सोयाबीन तिलहन का खरीद दाम नीचा बोल रहे हैं।

इस बीच, सरकार ने आयातित खाद्यतेलों का आयात शुल्क मूल्य बढ़ा दिया है। इस बढ़ोतरी के तहत सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन तेल के आयात शुल्क मूल्य में 35 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन डीगम तेल के आयात शुल्क मूल्य में 24 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई।

सूत्रों ने कहा कि जब बाजार में सोयाबीन तेल में गिरावट चल रही हो तो ऐसे में ठंड में जमने वाले पाम-पामोलीन की मांग नहीं रह जाएगी। मांग कमजोर रहने से पाम-पामोलीन तेल के दाम भी गिरावट के साथ बंद हुए।

उन्होंने कहा कि शनिवार को अधिकांश बहुराष्ट्रीय तेल कंपनियां बंद रहने से कामकाज सुस्त रहता है और यह भी खाद्यतेल कीमतों में गिरावट का एक कारण है। विदेशी तेलों में गिरावट के अनुरूप बिनौला तेल के दाम भी गिरावट दर्शाते बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि मंडियों में मूंगफली की उपलब्धता कम है। इसके दाम भी ऊंचा हैं। कमजोर कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

सोमवार को शिकागो एक्सचेंज में कामकाज बंद रहेगा।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,910-6,935 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,125-7,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,775-3,075 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,390-2,490 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,390-2,535 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,725 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,625 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,525 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,350-5,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,950-5,000 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम


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