फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन की जांच का आदेश निरस्त

फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन की जांच का आदेश निरस्त

फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन की जांच का आदेश निरस्त
Modified Date: February 3, 2026 / 07:41 pm IST
Published Date: February 3, 2026 7:41 pm IST

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के वर्ष 2020 का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें ई-कॉमर्स विक्रेता फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कानून के कथित उल्लंघन की जांच के निर्देश दिए गए थे।

इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) को वापस भेज दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि एनसीएलएटी को फ्लिपकार्ट की इस दलील पर विचार करते हुए मामले पर फिर से फैसला करना होगा कि उसने आयकर कार्यवाही से जुड़े आकलन अधिकारी की जिन टिप्पणियों पर भरोसा किया था, उन्हें बाद में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने निरस्त कर दिया था।

हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी मुद्दे एनसीएलएटी के समक्ष पुनर्विचार के लिए खुले रहेंगे।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम एनसीएलएटी से अनुरोध करते हैं कि वह इस अपील पर नए सिरे से फैसला करे। पक्षकार यह दलीलें रखने के लिए स्वतंत्र होंगे कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं और यदि बनता है, तो क्या मामले को फिर से प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को भेजने की जरूरत है।”

फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि न तो यह पाया गया है कि फ्लिपकार्ट संबंधित बाजार में प्रभुत्वशाली खिलाड़ी है और न ही उसने अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि एनसीएलएटी का आदेश मुख्यतः आयकर कार्यवाही में आकलन अधिकारी की टिप्पणियों पर आधारित था, जिन्हें बाद में आईटीएटी ने पलट दिया।

इस मामले की शुरुआत चार मार्च, 2020 के एनसीएलएटी आदेश से हुई थी, जब उसने अखिल भारतीय ऑनलाइन विक्रेता संघ (एआईओवीए) की शिकायत को बंद करने वाले सीसीआई के आदेश को रद्द कर दिया था।

एनसीएलएटी ने उस समय फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा चार के तहत प्रभुत्व के दुरुपयोग का प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए प्रतिस्पर्धा आयोग के महानिदेशक को जांच का निर्देश दिया था।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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