जी एंटरटेनमेंट मामले में निर्धारित समय में जांच पूरी करने को लेकर सेबी की विश्वसनीयता पर सवाल
जी एंटरटेनमेंट मामले में निर्धारित समय में जांच पूरी करने को लेकर सेबी की विश्वसनीयता पर सवाल
मुंबई, 14 सितंबर (भाषा) प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने बृहस्पतिवार को जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज मामले में निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी करने को लेकर बाजार नियामक सेबी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
अपीलीय न्यायाधिकरण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश के खिलाफ जी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। आदेश में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा को मीडिया कंपनी में धन की कथित हेराफेरी को लेकर कंपनी और अन्य संगठनों में कोई भी प्रमुख प्रबंधकीय पद संभालने से रोक लगाई गई थी।
सेबी के वकील डेरियस खंबाटा की दलीलों को सुनने के बाद सैट ने कहा, ‘‘इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि इन आठ महीनों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा …सेबी का पिछला रिकॉर्ड यह है कि उन्होंने हमेशा जांच बढ़ाया है। ऐसा सिर्फ एक मामले में नहीं बल्कि कई मामलों में हुआ है। हाल ही में अडाणी और बेनेट कोलमैन में यह देखने को मिला। निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी करने के मामले में आपकी (सेबी)विश्वसनीयता नहीं है।’’
खंबाटा ने अपनी दलील में कहा, ‘‘…वे अनुबंधों से छूट देते हैं, जो जी एंटरटेनमेंट का इन कंपनियों के साथ था… …उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने कौन सी सेवाओं का लाभ उठाया…आप (गोयनका) इन कंपनियों के नियंत्रण में हैं और आपको नहीं लगता कि आपको कोई स्पष्टीकरण देना चाहिए। …इसके बारे में चीजें साफ करना करना आपका दायित्व है।’’
खंबाटा ने आगे कहा कि तथ्य यह है कि जी एंटरटेनमेंट यह कह रही है कि वह स्पष्टीकरण नहीं देगी और उसे स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता नहीं है। यह महत्वपूर्ण है।
जी एंटरटेनमेंट ने कहा कि सेबी का आदेश जी-सोनी विलय के लिये महत्वपूर्ण है।
पुनीत गोयनका की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जी एंटरटेनमेंट लेनदेन को स्वीकार करतर है और वे आधिकारिक लेनदेन थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसे संदिग्ध पाया तो इसे आठ माह तक निलंबित क्यों रखा गया?
सिंघवी ने कहा कि लेनदेन से जी एंटरटेनमेंट को कोई नुकसान नहीं हुआ और न ही गोयनका को कोई फायदा हुआ।
उन्होंने कहा कि गोयनका विलय सौदे के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सिंघवी ने कहा, ‘‘गोयनका 10-15 साल से उद्योग में हैं और बाजार को समझते हैं।’’
मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।
उल्लेखनीय है कि सैट ने जून में चंद्रा और उनके बेटे पुनीत गोयनका को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
बाजार नियामक ने उन्हें किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में कोई भी प्रमुख प्रबंधकीय पद संभालने से रोक दिया था। उसके बाद, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने सेबी के आदेश को सैट में चुनौती दी।
भाषा
रमण अजय
अजय

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