कच्चे जूट का संकट: केंद्रीय कपड़ा मंत्री से मुलाकात के बाद आईजेएमए को समाधान की उम्मीद

कच्चे जूट का संकट: केंद्रीय कपड़ा मंत्री से मुलाकात के बाद आईजेएमए को समाधान की उम्मीद

कच्चे जूट का संकट: केंद्रीय कपड़ा मंत्री से मुलाकात के बाद आईजेएमए को समाधान की उम्मीद
Modified Date: February 9, 2026 / 08:01 pm IST
Published Date: February 9, 2026 8:01 pm IST

कोलकाता, नौ फरवरी (भाषा) जूट मिलों ने सोमवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के साथ बैठक के बाद चल रहे कच्चे जूट संकट के समाधान की उम्मीद जताई।

इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आईजेएमए) के सूत्रों ने बताया कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह उनकी सिफारिशों पर विचार करेंगे।

रविवार को सेंट्रल रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर जूट एंड एलाइड फाइबर्स (सीआरआईजेएएफ) में हुई बैठक में आईजेएमए ने जूट कमिश्नर कार्यालय (जेसीओ) को पहले सौंपे गए अपने समयबद्ध आपातकालीन प्रस्ताव को दोहराया।

एसोसिएशन ने व्यापारियों के लिए कच्चे जूट के स्टॉक की सीमा को 31 मार्च तक शून्य करने की मांग की, और प्रस्ताव दिया कि सभी उपलब्ध स्टॉक को अनिवार्य रूप से चालू मिलों को बेचा जाए या जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) को निविदा किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि पर्याप्त फसल के अनुमान के बावजूद, 25-30 लाख गांठ कच्चा जूट व्यापारियों और बिचौलियों के पास रुका हुआ है।

इस कृत्रिम कमी के कारण कीमतें बढ़कर अप्रत्याशित रूप से 13,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं, जिससे मिलें बंद हो रही हैं और लगभग एक लाख मजदूरों का रोजगार खतरे में पड़ गया है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय आपूर्ति पक्ष की गड़बड़ी को दूर करने के लिए नियमित बाजार प्रतिक्रियाओं के बजाय ‘असाधारण, समयबद्ध नियामक हस्तक्षेप’ अपनाने के लिए इच्छुक है।

बैठक में मौजूद आईजेएमए के पूर्व अध्यक्ष, संजय कजारिया ने कहा, ‘‘हमने केंद्रीय मंत्री को फाइबर की उपलब्धता और बाजार की गड़बड़ी के बारे में जमीनी हकीकत बताई है, और हम इस क्षेत्र को स्थिर करने और किसानों, मजदूरों और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा के लिए आवश्यक किसी भी उपाय का समर्थन करने के लिए सरकार, जेसीओ और जेसीआई के साथ काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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