नई दिल्ली: RBI Cancelled Bank Licence News: आरबीआई ने एक बार फिर नियमों का उल्लंघन करने वाले बैंक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त कर दिया है। आरबीआई की ओर से 22 जुलाई को जारी एक आदेश में कहा गया है कि करवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक (Karwar Urban Co-operative Bank) अब बैंकिंग बिजनेस नहीं कर सकेगा। यह नियम 23 जुलाई 2025 को कारोबार बंद होने के बाद से लागू हो गया है। आरबीआई का कहना है कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और यह बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949 की शर्तों को पूरा नहीं करता। यानि इस बैंक के ग्राहक अब अपना जमा पैसा फिलहाल नहीं निकाल पाएंगे।
RBI Cancelled Bank Licence News: आरबीआई के नियमों के अनुसार हर जमाकर्ता को अधिकतम ₹5 लाख तक की राशि DICGC (जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम) से वापस मिलती है, चाहे वह सेविंग, करंट या FD अकाउंट में हो। करवार बैंक का उदाहरण: यहां 92.9% खाताधारक ऐसे थे जिनकी जमा राशि ₹5 लाख से कम थी, इसलिए उन्हें पूरा पैसा मिलेगा। DICGC ने पहले ही ₹37.79 करोड़ का भुगतान कर दिया है। वहीं, अगर आपके खाते में ₹5 लाख से ज्यादा रकम है, तो बाकी पैसा डूब सकता है। इसलिए RBI सलाह देता है कि बैंक चुनते समय उसकी वित्तीय हालत जरूर चेक करें।
करवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
RBI ने कहा कि बैंक की वित्तीय स्थिति कमजोर थी और यह बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949 के तहत जरूरी शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहा था।
करवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक अब क्या करें?
जिन ग्राहकों की जमा राशि ₹5 लाख तक है, उन्हें DICGC से पूरी रकम मिलेगी। उन्हें DICGC की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
करवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के खाते में ₹5 लाख से ज्यादा होने पर क्या होगा?
₹5 लाख से अधिक की राशि का कोई बीमा नहीं होता। बची हुई रकम बैंक की परिसंपत्तियों की बिक्री के बाद मिलने की संभावना होती है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है।
DICGC के तहत कितनी रकम मिलती है?
DICGC हर खाताधारक को अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि (Savings, Current, FD) लौटाता है।
भविष्य में बैंक चुनते समय क्या सावधानी रखें?
हमेशा RBI द्वारा मान्यता प्राप्त बैंकों को चुनें और बैंक की वित्तीय स्थिति व क्रेडिट रेटिंग की जानकारी रखें।