पश्चिम एशिया संकट के बीच आरबीआई ने निर्यात ऋण अवधि 450 दिन तक बढ़ाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच आरबीआई ने निर्यात ऋण अवधि 450 दिन तक बढ़ाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच आरबीआई ने निर्यात ऋण अवधि 450 दिन तक बढ़ाई
Modified Date: March 31, 2026 / 07:15 pm IST
Published Date: March 31, 2026 7:15 pm IST

मुंबई, 31 मार्च (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को पश्चिम एशिया संकट के कारण जारी लॉजिस्टिक बाधाओं को देखते हुए निर्यात खेप भेजने के पहले और बाद के लिए आवंटित ऋण की विस्तारित अवधि को 450 दिन तक बढ़ाने की घोषणा की।

यह सुविधा अब 30 जून, 2026 तक किए गए सभी ऋण वितरण पर लागू होगी।

निर्यात खेप भेजने के पहले और बाद में दिया जाने वाला ऋण, निर्यातकों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता होता है। निर्यात-पूर्व ऋण का उपयोग निर्यात से पहले कच्चा माल खरीदने, उत्पादन और पैकेजिंग के लिए किया जाता है, जबकि निर्यात-पश्चात ऋण भेजे गए माल का भुगतान मिलने तक कार्यशील पूंजी जरूरतें पूरा करने में मदद करता है।

आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा कि विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। हितधारकों का कहना था कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के कारण निर्यात आय को तय समयसीमा में हासिल करना मुश्किल हो रहा है।

इससे पहले यह रियायत 31 मार्च, 2026 तक के वितरण के लिए उपलब्ध थी लेकिन अब इसे तीन महीने और बढ़ा दिया गया है। यह कदम पहली बार नवंबर, 2025 में वैश्विक व्यापार तनाव के बीच उठाया गया था।

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्यात मूल्य की वसूली और उसे देश में वापस लाने की समयसीमा को नौ महीने से बढ़ाकर 15 महीने करने की पहले दी गई छूट जारी रहेगी। यह छूट वस्तुओं, सॉफ्टवेयर और सेवाओं के निर्यात पर लागू है।

केंद्रीय बैंक ने कहा, “पश्चिम एशिया संकट के कारण जारी लॉजिस्टिक व्यवधानों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि 30 जून, 2026 तक किए गए सभी वितरणों के लिए 450 दिन की बढ़ी हुई निर्यात ऋण अवधि लागू रहेगी।”

यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और निर्यात वित्तपोषण से जुड़े सभी विनियमित संस्थानों- वाणिज्यिक बैंक, सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होगा।

आरबीआई ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य भू-राजनीतिक तनाव के चलते कर्ज सेवा के बोझ को कम करना और निर्यात गतिविधियों में लगी व्यवहार्य इकाइयों के संचालन को जारी रखना है।

साथ ही, केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी उपयुक्त कदम उठाएगा।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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