आरबीआई ने बैंकों के लिए बासेल तीन के तहत बाजार जोखिम पर पूंजी जरूरतों के नए नियम जारी किए

आरबीआई ने बैंकों के लिए बासेल तीन के तहत बाजार जोखिम पर पूंजी जरूरतों के नए नियम जारी किए

आरबीआई ने बैंकों के लिए बासेल तीन के तहत बाजार जोखिम पर पूंजी जरूरतों के नए नियम जारी किए
Modified Date: September 21, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: September 21, 2026 7:45 pm IST

मुंबई, 21 सितंबर (भाषा) बैंकों को कम पूंजी आवश्यकता हासिल करने के उद्देश्य से नियामकीय लाभ लेने के लिए किसी वित्तीय साधन को ‘ट्रेडिंग बुक’ और ‘बैंकिंग बुक’ के बीच फिर से वर्गीकृत करने की अनुमति नहीं होगी। भारतीय रिजर्व बैंक के बाजार जोखिम के लिए न्यूनतम पूंजी जरूरत संबंधी निर्देशों में यह कहा गया है।

सोमवार को जारी इन निर्देशों का उद्देश्य संशोधित बासेल-तीन रूपरेखा के अनुरूप बाजार जोखिम संबंधी दिशानिर्देशों को बनाना है। साथ ही, नियमों को सरल रखने, बैंकों को मजबूती देने और उन्हें आसानी से लागू करने पर भी जोर दिया गया है।

ये निर्देश छोटे वित्त बैंक, भुगतान बैंक और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों को छोड़कर सभी वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होंगे।

आरबीआई ने कहा कि ये निर्देश एक अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे, जिससे बैंकों को इनका अनुपालन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘बैंक कम पूंजी आवश्यकता हासिल करने के उद्देश्य से नियमों के अंतर का फायदा उठाने के लिए वित्तीय साधनों को दोबारा से ‘ट्रेडिंग बुक’ और ‘बैंकिंग बुक’ के बीच एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में नहीं डाल सकेंगे।’’

आरबीआई ने कहा कि बैंकों को बाजार जोखिम के लिए जोखिम-भारांश परिसंपत्तियों की गणना में सरल मानकीकृत पद्धति का इस्तेमाल करना होगा।

आरबीआई ने कहा कि ब्याज दर जोखिम के लिए विशिष्ट जोखिम तालिकाओं में भी संशोधन किया गया है, ताकि उन्हें बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति के दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाया जा सके। इससे जोखिम के आकलन का तरीका अधिक संक्षिप्त और स्पष्ट होगा।

‘ट्रेडिंग बुक’ में रखे गए बॉण्ड म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में कारोबार किए जाने वाले कोष के मामले में पूंजी निर्धारण की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ अंतर्निहित जोखिम के आधार पर पूंजी की गणना सुनिश्चित करना है।

भाषा रमण अजय

अजय


लेखक के बारे में