National Film Awards: कैसे हुई थी फिल्मों को अवार्ड देने की शुरुआत.. कौन थे दादा साहेब फाल्के? एक क्लिक में जानिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इतिहास

कैसे हुई थी फिल्मों को अवार्ड देने की शुरुआत.. कौन थे दादा साहेब फाल्के? History of National Film Awards

National Film Awards: कैसे हुई थी फिल्मों को अवार्ड देने की शुरुआत.. कौन थे दादा साहेब फाल्के? एक क्लिक में जानिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इतिहास
Modified Date: September 21, 2026 / 06:52 pm IST
Published Date: September 21, 2026 6:37 pm IST

नई दिल्लीः National Film Awards: दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। भारत की राष्ट्रपति 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (पूर्व में नाम केवड़िया) में ये पुरस्कार प्रदान करेंगी। भारत सरकार की ओर हर वर्ष दिए जाने वाले दादा साहेब फाल्के सहित अन्य फिल्म पुरस्कारों को बारे में आपने अक्सर सुना होगा, लेकिन आपको पता है कि इसकी शुरुआत कैसे और कब हुई थी? चलिए जानते हैं इस खबर के जरिए..

National Film Awards: दरअसल, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हैं। 1954 में शुरू किए गए ये पुरस्कार हर साल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रदान किए जाते हैं। सात दशकों से अधिक समय से ये पुरस्कार फीचर फिल्में, नॉन-फीचर फिल्में और सिनेमा पर लेखन जैसे विधाओं पर दिए जा रहे हैं। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वर्ष 2024 के लिए एक्टर अनंत नाग का चयन भी इन्हीं आधारों पर किया गया है।इसकी घोषणा 18 जुलाई 2026 को तीनों जूरी के अध्यक्षों द्वारा की गई थी।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का पहला संस्करण (National Film Awards)

भारतीय सिनेमा की यात्रा 1913 में दादासाहेब फाल्के की फिल्म राजा हरिश्चंद्र के साथ शुरू हुई थी। 1949 में गठित फ़िल्म इन्क्वायरी कमेटी ने ‘फिल्मों के लिए राज्य पुरस्कारों’ की शुरुआत करने की सिफारिश की थी। इनका गठन भारतीय सिनेमा में कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता को सम्मानित करने तथा उसे बढ़ावा देने के लिए किया गया था। ये पुरस्कार 1954 में शुरू हुए थे और इसके पहले संस्करण में वर्ष 1953 की फिल्मों को सम्मानित किया गया था। पहला संस्करण तीन श्रेणियों में आयोजित किया गया था, जिनके नाम हैं — फीचर फिल्में, वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) फिल्में और बाल फिल्में। मराठी फिल्म श्यामची आई ने सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय फीचर फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल जीता। महाबलीपुरम ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल जीता, और दो बीघा जमीन को सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट मिला। इस प्रकार केवल सात सम्मानों के साथ हुई एक सहज शुरुआत ने भारतीय सिनेमा के लिए राष्ट्रीय पहचान के सात दशकों का मार्ग प्रशस्त किया। वर्ष 1967 की फिल्मों के लिए पहली बार कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार शुरू किए गए। उत्तम कुमार और नरगिस को 1968 में पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उस समय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार को भारत और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार को उर्वशी कहा जाता था। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत 1969 में हुई और यह सबसे पहले देविका रानी को प्रदान किया गया। जैसे-जैसे भारतीय सिनेमा का दायरा और विस्तार बढ़ता गया, वैसे-वैसे इसमें नई श्रेणियों और तकनीकी विधाओं को लगातार जोड़ा जाता रहा।

वर्ष महत्वपूर्ण पड़ाव
1913 दादासाहेब फाल्के ने फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्माण पूरा किया, जो भारतीय सिनेमा निर्माण के इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ।
1954 इन पुरस्कारों की शुरुआत फिल्मों के लिए राज्य पुरस्कार के रूप में की गई। पहला सम्मान वर्ष 1953 में बनी फिल्मों को प्रदान किया गया।
1967-68 कलाकारों और तकनीशियनों के लिए पुरस्कारों की शुरुआत हुई। उत्तम कुमार और नरगिस ने पहले अभिनय सम्मान अपने नाम किए।
1969 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की गई। देविका रानी इसकी पहली विजेता बनीं।
1973 फिल्म महोत्सव निदेशालय ने इन पुरस्कारों के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी संभाली।
2022 फिल्म महोत्सव निदेशालय का एनएफडीसी में विलय कर दिया गया, जो वर्तमान में इन पुरस्कारों की आयोजक संस्था है।
2026 72वें पुरस्कारों की घोषणा जुलाई में की गई। इस सम्मान समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में किया जाएगा।

 

जानिए पुरस्कार में क्या-क्या मिलता है?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन तीन प्रमुख वर्गों और एक लाइफटाइम ऑनर के साथ किया जाता है। फीचर फिल्म वर्ग पूर्ण लंबाई की फिल्मों के लिए है। गैर-फीचर फिल्म वर्ग वृत्तचित्रों, लघु फिल्मों, एनीमेशन और अन्य संबद्ध विधाओं के लिए समर्पित है। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन वर्ग सर्वश्रेष्ठ पुस्तक और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक को सम्मानित करता है। वहीं, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान के रूप में एक विशेष स्थान रखता है।

वर्ग श्रेणियाँ पदक / सम्मान नकद पुरस्कार
फीचर फिल्म्स 26 (स्पेशल मेंशन सहित) स्वर्ण कमल, रजत कमल ₹3,00,000 और ₹2,00,000
गैर-फीचर फिल्म्स 16 (स्पेशल मेंशन सहित) स्वर्ण कमल, रजत कमल ₹3,00,000 और ₹2,00,000
सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन 2 स्वर्ण कमल ₹1,00,000
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार स्वर्ण कमल, शॉल ₹10,00,000 (72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए)

फीचर फिल्म वर्ग में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के अलावा अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं। इसमें सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सिनेमाटोग्राफी, सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन भी शामिल हैं। गैर-फीचर वर्ग में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री), सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म (शॉर्ट फिल्म) और सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म शामिल हैं। इसके अलावा इसमें सर्वश्रेष्ठ कला और संस्कृति फिल्म, सर्वश्रेष्ठ नरेशन या वॉयस ओवर और सर्वश्रेष्ठ पटकथा जैसे अवॉर्ड भी दिए जाते हैं।

हर भारतीय भाषाओं को दिया जाता है यह अवार्ड

बता दें कि यह पुरस्कार केवल हिंदी फिल्मों को नहीं, बल्कि संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध प्रत्येक भाषा में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया जाता है। अनुसूची के बाहर की भाषाओं में बनी फिल्मों को अलग से विशेष पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जाता है। 72वें संस्करण में इसी प्रावधान के तहत गढ़वाली भाषा की फिल्म ढोली और तुलु भाषा की फिल्म इम्बू को सम्मानित किया गया। चयन प्रक्रिया की बात करें तो हर साल पिछले कैलेंडर वर्ष में प्रमाणित फिल्मों के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाती हैं। इसके बाद मंत्रालय पुरस्कारों के तीनों वर्गों के लिए अलग-अलग जूरी (निर्णायक मंडल) का गठन करता है। इन जूरी सदस्यों के रूप में सिनेमा, संबद्ध कला रूपों और ह्यूमैनिटीज (मानविकी) के क्षेत्र से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों को चुना जाता है।

फीचर फिल्मों के लिए होता है दो-स्तरीय मूल्यांकन

57वें संस्करण से लागू की गई दो-स्तरीय व्यवस्था के तहत फीचर फिल्मों का मूल्यांकन किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त प्रविष्टियों को सबसे पहले पाँच क्षेत्रीय पैनल शॉर्टलिस्ट करते हैं। इसके बाद, एक केंद्रीय पैनल फीचर फिल्म वर्ग में पुरस्कार विजेताओं का अंतिम निर्णय लेता है। नॉन-फीचर फिल्म सेक्शन और सिनेमा पर बेहतरीन लेखन वाले सेक्शन के लिए अलग-अलग जूरी होती हैं। वहीं, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए कोई प्रविष्टियाँ आमंत्रित नहीं की जाती हैं; इसकी प्रक्रिया अलग होती है। प्रतिष्ठित सिनेमा हस्तियों की एक विशेष रूप से गठित समिति इसके विजेता के नाम की सिफारिश करती है। जयराज ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता की। इसी संस्करण के लिए गैर-फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता असीम सिन्हा ने की। वहीं, सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन जूरी की अध्यक्षता ए. चंद्रशेखर ने की।

कैसी फिल्मों को मिलता है अवार्ड?

फिल्मों को पुरस्कार वर्ष के दौरान सीबीएफसी द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य है और उनमें अंग्रेजी उपशीर्षक होने चाहिए। फीचर फिल्म की अवधि 72 मिनट से अधिक होनी चाहिए। डब की गई, रीमेक बनाई गई या पहले से प्रस्तुत की जा चुकी री-एडिटेड प्रतियाँ इसके लिए पात्र नहीं हैं।

इन फिल्मों को जीता 72वां फिल्म पुरस्कार

पुरस्कार फिल्म (भाषा) पुरस्कार विजेता
सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म आर्टिकल 370 (हिंदी) निर्माता: जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज;

निर्देशक: आदित्य सुहास जंभाले

सर्वश्रेष्ठ निर्देशन अमरन (तमिल) राजकुमार पेरियासामी
मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता ब्रमायुगम (मलयालम);

चंदू चैंपियन (हिंदी)

ममूटी और कार्तिक आर्यन (संयुक्त रूप से)
मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री आर्टिकल 370 (हिंदी) यामी गौतम
सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता भक्षक (हिंदी) संजय मिश्रा
सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री महाराजा (तमिल);

मिथ्या (कन्नड़)

सच्चाना नामीदास और रोपाश्री वर्काडी (साझा)
निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर (हिंदी) रणदीप हुड्डा
संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म कल्कि 2898 एडी (तेलुगु) निर्माता: वैजयंती मूवीज;

निर्देशक: नाग अश्विन सिंगीरेड्डी

राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरण मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म कैप्टन मिलर (तमिल) निर्माता: सत्य ज्योति फिल्म्स;

निर्देशक: अरुण मथेश्वरन

सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म 35 – चिन्ना कथा कादू (तेलुगु) निर्माता: एस ओरिजिनल्स और वाल्टेयर प्रोडक्शंस;

निर्देशक: नंदा किशोर इमानी

सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन आर्टिकल 370 (हिंदी);

अमरन (तमिल)

शाश्वत सचदेव (गीत);

जी. वी. प्रकाश कुमार (पार्श्व संगीत)

सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म भंगार (मराठी और अंग्रेजी) निर्माता एवं निर्देशक: सुमिरा रॉय
निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म (गैर-फीचर) आंगेन (संथाली) निर्देशक: रवि राज मुर्मू
सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) राम-नामी (हिंदी) निर्माता: बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड;

निर्देशक: भारतबाला गणपति

सर्वश्रेष्ठ निर्देशन (गैर-फीचर) स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – एकता का प्रतीक (हिंदी) आनंद एल. राय
सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक नानिरुवुदे निमगागी

नादिरुवुदे ननगागी (कन्नड़)

 

लेखक: कंचनूरु प्रदीप कुमार शेट्टी;

प्रकाशक: मिरर पुस्तका

सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक हिंदी संजीव श्रीवास्तव

1969 में हुई थी दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान है। इसकी शुरुआत वर्ष 1969 में की गई थी, जब यह पहली बार देविका रानी को प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार दादासाहेब फाल्के की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने वर्ष 1913 में फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। बता दें कि धुंडिराज गोविंद फाल्के यानी दादासाहेब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली पूर्ण-लंबाई वाली फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। इसके बाद उन्होंने 94 फीचर फिल्मों और 27 लघु फिल्मों का निर्माण किया। भारतीय सिनेमा के पितामह के रूप में सम्मानित दादासाहेब फाल्के की स्मृति में भारत सरकार द्वारा वर्ष 1969 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की गई थी।

जानिए कौन हैं 2024 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता अनंत नाग

वर्ष 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार श्री अनंत नाग को प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार ने 16 सितंबर 2026 को इस निर्णय की घोषणा की। उनका जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक में हुआ था और उन्होंने 70 के दशक की शुरुआत में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत कन्नड़ फीचर फिल्म संकल्प से की, जबकि फिल्म अंकुर से उन्होंने हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया। उन्होंने छह भारतीय भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में विभिन्न प्रकार के किरदारों को जीवंत किया है। उनके काम में बेहद लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक मालगुडी डेज भी शामिल है। उन्होंने पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पांच कर्नाटक राज्य पुरस्कार जीते हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2025 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनकी सिनेमा की यात्रा पांच दशकों से भी ज़्यादा लंबी है और इसने कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

हाल के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता

बता दें कि मोहनलाल को वर्ष 2023 के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ। मिथुन चक्रवर्ती को वर्ष 2022 का यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। श्रीमती वहीदा रहमान को वर्ष 2021 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रत्येक पुरस्कार संबंधित संस्करण के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाता है।

 


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।