आरबीआई ने अग्रणी बैंक योजना में संशोधन के प्रस्ताव जारी किए

आरबीआई ने अग्रणी बैंक योजना में संशोधन के प्रस्ताव जारी किए

आरबीआई ने अग्रणी बैंक योजना में संशोधन के प्रस्ताव जारी किए
Modified Date: February 13, 2026 / 05:36 pm IST
Published Date: February 13, 2026 5:36 pm IST

मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ‘अग्रणी बैंक योजना’ (एलबीएस) के परिचालन ढांचे को सुव्यवस्थित करने और कार्यक्रम की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए शुक्रवार को संशोधित दिशानिर्देश प्रस्तावित किए।

यह योजना वर्ष 1969 में जिला स्तर पर विकास गतिविधियों के समन्वय के लिए शुरू की गई थी।

एलबीएस का उद्देश्य बैंकों, सरकार और अन्य विकास एजेंसियों की गतिविधियों का समन्वय कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाना और वित्तीय समावेश को मजबूती देना है।

प्रस्तावित दिशानिर्देशों में योजना के उद्देश्यों को परिष्कृत करने, विभिन्न मंचों की संरचना, सदस्यता एवं कार्यसूची को स्पष्ट करने, प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को निर्धारित करने और राज्य-स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) और अग्रणी जिला प्रबंधक कार्यालयों को मजबूत बनाने के प्रावधान शामिल हैं।

आरबीआई के मसौदा परिपत्र के मुताबिक, केंद्रीय बैंक हरेक जिले में एक वाणिज्यिक बैंक को अग्रणी बैंक के रूप में नामित करेगा, जो ऋण संस्थानों, सरकार और अन्य हितधारकों के प्रयासों का समन्वय कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह और वित्तीय समावेश को बढ़ावा देगा।

एसएलबीसी संयोजक बैंक राज्य में सभी बैंकों की गतिविधियों का समन्वय करेंगे और ऋण वितरण में आने वाली परिचालन संबंधी समस्याओं पर राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ नियमित चर्चा करेंगे।

मसौदे के मुताबिक, अग्रणी बैंक योजना के तहत ऋण योजना के लिए ‘नीचे से ऊपर’ का दृष्टिकोण अपनाया जाएगा, जिसमें ब्लॉक और गतिविधि-वार संभावनाओं का आकलन कर ऋण योजनाएं तैयार की जाएंगी।

ऋण-जमा अनुपात (सीडी अनुपात) को महत्वपूर्ण मानदंड बताते हुए आरबीआई ने कहा कि बैंकों को ग्रामीण और कस्बाई शाखाओं के संदर्भ में अखिल भारतीय स्तर पर 60 प्रतिशत सीडी अनुपात हासिल करना होगा।

केंद्रीय बैंक ने मसौदा दिशानिर्देशों पर छह मार्च, 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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