कीमती धातुओं के मूल्यों में वृद्धि से आरबीआई ने मुद्रास्फीति के अनुमान में मामूली वृद्धि की
कीमती धातुओं के मूल्यों में वृद्धि से आरबीआई ने मुद्रास्फीति के अनुमान में मामूली वृद्धि की
(तस्वीर के साथ)
मुंबई, छह फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कीमती धातुओं के मूल्य में बढ़ोतरी के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर शुक्रवार को 2.1 प्रतिशत कर दिया है। वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए भी अनुमान ऊपर की ओर संशोधित किए गए हैं।
केंद्रीय बैंक ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति क्रमशः चार प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
आरबीआई ने दिसंबर में 2025-26 के लिए इसके दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वहीं 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई दर क्रमशः 3.9 प्रतिशत और चार प्रतिशत आंकी गई थी।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित कुल मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर, 2025 में 1.3 प्रतिशत रही।
खाद्य समूह पदार्थों में नरमी बनी रही जबकि ईंधन समूह में मुद्रास्फीति नवंबर और दिसंबर में मध्यम स्तर पर रही।
कीमती धातुओं के मूल्यों में तेजी के बावजूद मुख्य मुद्रास्फीति (खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी नियंत्रण में रही। सोने के अलावा दिसंबर में मुख्य मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि 2026-27 की पहली व दूसरी तिमाही के लिए संशोधित सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत बना हुआ है। यह अनुकूल होने के साथ ही मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मुद्रास्फीति अनुमान को मामूली रूप से ऊपर की ओर संशोधन मुख्यत: कीमती धातुओं के मूल्यों में बढ़ोतरी के कारण किया गया। इनका योगदान करीब 0.60 प्रतिशत से 0.70 प्रतिशत है। अंतर्निहित मुद्रास्फीति अब भी निम्न स्तर पर बनी हुई है।’’
गवर्नर ने कहा कि निकट भविष्य का परिदृश्य बताता है कि खरीफ उत्पादन अच्छा रहने, खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार, अनुकूल रबी बुवाई एवं पर्याप्त जलाशय स्तर के चलते खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं।
मल्होत्रा ने कहा कि कीमती धातुओं के मूल्यों से संभावित अस्थिरता को छोड़ दें तो मुख्य मुद्रास्फीति सीमित दायरे में रहने के आसार हैं।
भूराजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिकूल मौसम आदि मुद्रास्फीति के बढ़ने को लेकर जोखिम उत्पन्न करते हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई श्रृंखला (आधार वर्ष 2024) के 12 फरवरी को जारी होने के मद्देनजर आरबीआई समूचे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान अप्रैल, 2026 की नीति घोषणा में पेश करेगा।
भाषा निहारिका अजय
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