आरबीआई ने निवेशकों की अधिक रिटर्न की मांग पर ट्रेजरी बिल नीलामी में सभी बोलियां खारिज कीं

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आरबीआई ने निवेशकों की अधिक रिटर्न की मांग पर ट्रेजरी बिल नीलामी में सभी बोलियां खारिज कीं

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 07:59 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 07:59 PM IST

मुंबई, 25 मार्च (भाषा) बैंकिंग प्रणाली में नकदी की सख्त स्थिति के बीच निवेशकों द्वारा उम्मीद से अधिक ब्याज मांगे जाने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को ट्रेजरी बिलों की नीलामी रद्द कर दी।

बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक पिछली नीलामी के मुकाबले 0.05-0.10 प्रतिशत अधिक मुनाफा चाह रहे थे, जिसे स्वीकार करने के बजाय आरबीआई ने सभी बोलियों को ठुकराना बेहतर समझा।

पिछले 13 महीनों में यह दूसरी बार है जब आरबीआई ने बोलियां खारिज की हैं। इससे पहले 21 फरवरी, 2025 को हुई नीलामी के दौरान 91 दिवसीय और 182 दिवसीय ट्रेजरी बिलों के लिए बोलियां खारिज की गई थीं।

धनलक्ष्मी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख बालसुब्रमण्यन आर ने कहा, ‘बैंकिंग प्रणाली में नकदी की किल्लत की वजह से निवेशकों ने नीलामी में 0.05-0.10 प्रतिशत अधिक प्रतिफल की मांग रखी थी, जिसे आरबीआई ने स्वीकार नहीं किया और सभी बोलियों को खारिज कर दिया।’

भारत सरकार ट्रेजरी बिल (टी-बिल) को मुद्रा बाजार के एक साधन के रूप में जारी करती है। यह एक प्रकार का वचन-पत्र होता है, जो भविष्य की एक तय तिथि पर पुनर्भुगतान की गारंटी देता है। आमतौर पर बैंक, प्राथमिक डीलर, खुदरा निवेशक और संस्थागत निवेशक इन नीलामियों में हिस्सा लेते हैं।

ट्रेजरी बिल अल्पकालिक ऋण के साधन हैं जिनकी परिपक्वता अवधि अधिकतम 364 दिन की होती है। इन्हें इनके अंकित मूल्य पर बट्टे के साथ जारी किया जाता है और इन पर समय-समय पर कोई ब्याज भुगतान नहीं होता है।

पिछले तीन सप्ताह के दौरान बैंकिंग प्रणाली में नकदी की निरंतर किल्लत के चलते, निवेशकों ने सरकार से उधार के बदले वसूले जाने वाले मुनाफे में बढ़ोतरी कर दी है। इसके परिणामस्वरूप 91-दिवसीय और 182-दिवसीय अवधि के ट्रेजरी बिलों पर ब्याज की दर लगभग 0.03 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि 364-दिवसीय अवधि के लिए इस मुनाफे की दर में 0.06 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

अग्रिम कर और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के भुगतान की वजह से हाल के सप्ताहों में बैंकिंग प्रणाली में नकद पैसे की किल्लत बनी हुई है। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विशेष नीलामी (वीआरआर) के जरिये बाज़ार में अस्थायी नकदी डाली है।

रिजर्व बैंक ने अलग-अलग समय के लिए की गई इन विशेष नीलामियों के ज़रिये बैंकिंग प्रणाली में कुल 2.08 लाख करोड़ रुपये की अस्थायी नकद राशि डाली है। बाज़ार के जानकारों का कहना है कि पैसे की इस कमी को दूर करने और ब्याज दरों को काबू में रखने के लिए आरबीआई आने वाले दिनों में ऐसी और भी नीलामियां कर सकता है।

भाषा सुमित अजय

अजय