आरबीआई यूपीआई को टिकाऊ बनाने, बुनियादी ढांचे में सुधार के तरीके खोजेगा
आरबीआई यूपीआई को टिकाऊ बनाने, बुनियादी ढांचे में सुधार के तरीके खोजेगा
मुंबई, छह फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक लोकप्रिय भुगतान मंच यूपीआई को हितधारकों के लिए टिकाऊ बनाने और इसके बुनियादी ढांचे में सुधार सुनिश्चित करने के तरीके खोजेगा।
उन्होंने फरवरी की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम निश्चित रूप से न केवल इस बहुत महत्वपूर्ण भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए, बल्कि इसमें सुधार करने का एक रास्ता खोजने में सक्षम होंगे। यह पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में बहुत ही अनूठा रहा है।’’
उन्होंने आगे कहा कि इससे ग्राहकों के लिए भुगतान बुनियादी ढांचे से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
इस समय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सभी उपयोगकर्ताओं के लिए लगभग मुफ्त है, और बैंकों को लेनदेन करने के लिए सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से मुआवजा दिया जाता है, क्योंकि डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ने से अर्थव्यवस्था में नकदी के उपयोग को कम करने में मदद मिलती है।
यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े पक्ष क्रेडिट कार्ड के उपयोग की तरह ही ‘व्यापारी छूट दर’ (एमडीआर) वसूलने की अनुमति देने के लिए दबाव बना रहे हैं। उनका तर्क है कि मंच को टिकाऊ बनाने की जरूरत है। हालांकि, सरकार ने लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं की संवेदनशीलता को देखते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय

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