आरबीआई का रिकॉर्ड लाभांश सरकार की वित्तीय चुनौतियों को देगा कुछ राहत: विशेषज्ञ
आरबीआई का रिकॉर्ड लाभांश सरकार की वित्तीय चुनौतियों को देगा कुछ राहत: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये के लाभांश भुगतान से सरकार को पश्चिम एशिया संकट के बीच अपने वित्त को संभालने में सीमित राहत मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है।
शुक्रवार को घोषित यह अब तक का सर्वाधिक लाभांश है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 2.69 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 6.7 प्रतिशत अधिक है।
आरबीआई का यह अधिशेष हस्तांतरण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ‘आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के लाभांश/अधिशेष’ शीर्षक के तहत बजटीय गैर-कर राजस्व का 91 प्रतिशत हिस्सा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले लाभांश को जोड़ने पर वित्त वर्ष 2026-27 में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये के अनुमान में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, क्योंकि सरकारी बैंकों ने भी मजबूत लाभ दर्ज किया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह लगातार चौथा वर्ष है, जब बैंकों को बेहतर लाभ हुआ है।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि आरबीआई द्वारा सरकार को दिया गया 2.9 लाख करोड़ रुपये का लाभांश अपेक्षाओं के अनुरूप है और यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग सात प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि बजटीय अनुमानों की तुलना में वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की जरूरतें बढ़ सकती हैं तथा पश्चिम एशिया संकट के कारण कर संग्रह और तेल विपणन कंपनियों के लाभांश में कमी आने की आशंका है।
नायर ने कहा, ‘हालांकि आर्थिक स्थिरीकरण कोष और सोने-चांदी के आयात पर सीमा शुल्क में वृद्धि से कुछ राहत मिलने की संभावना है। लेकिन हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने पर केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत के बजटीय लक्ष्य से 0.4 प्रतिशत अधिक रह सकता है।’
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत के अनुसार, उच्च अधिशेष हस्तांतरण से वैश्विक स्थिति के कारण राजकोषीय घाटे पर पड़ने वाला कुछ दबाव कम होगा।
उन्होंने कहा कि अधिशेष हस्तांतरण, राजकोषीय स्थिरीकरण कोष और व्यय नियंत्रण से वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
पंत ने यह भी कहा कि यदि आरबीआई ने आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) को पिछले वर्ष के 44,862 करोड़ रुपये के स्तर तक ही सीमित रखा होता, तो यह हस्तांतरण 64,518 करोड़ रुपये अधिक हो सकता था।
उन्होंने कहा कि सीआरबी में उच्च राशि स्थानांतरित करने से आरबीआई को उभरती घरेलू और वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थितियों के अनुसार वित्तीय बाजार में हस्तक्षेप करने में मदद मिलेगी।
भाषा योगेश रमण
रमण

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