अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए ‘पैकेजिंग बैग’ की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती: अधिकारी
अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए ‘पैकेजिंग बैग’ की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती: अधिकारी
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईंधन और मालभाड़ा खर्च में बढ़ोतरी के साथ-साथ प्लास्टिक के ‘पैकेजिंग बैग’ की कीमतों में वृद्धि सीमेंट विनिर्माता अल्ट्राटेक के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि तब भी आदित्य बिड़ला समूह की इस कंपनी ने 2026-27 में दो अंकों की मात्रा वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
कंपनी प्रबंधन ने हाल ही में आय का विवरण देते हुए जानकारी दी कि पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी अस्थिरता के कारण ‘बैग’ लागत बढ़ी है। वहीं मार्च में रुपये में गिरावट से विनिमय हानि का असर भी अतिरिक्त दबाव के रूप में सामने आया।
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी अतुल डागा ने कहा, ‘‘ पिछली तिमाही में इसका प्रभाव कम रहा क्योंकि सभी के पास ईंधन का भंडार था। इसलिए ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर तुरंत नहीं दिखा। हालांकि मार्च में ‘बैग’ लागत संकट बन गई और सभी प्रभावित हुए। लागत बहुत तेजी से बढ़ी और ‘बैग’ पर हमारी अतिरिक्त लागत लगभग 90 करोड़ रुपये रही जो तिमाही के अन्य खर्चों में नजर आती है।’’
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से पॉलिमर और प्लास्टिक कच्चे माल की लागत 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
डागा ने एक प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि ‘पैकेजिंग’ लागत बढ़ी है लेकिन ‘बैग’ की उपलब्धता आपूर्ति पक्ष की समस्या नहीं बनी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ बैग की उपलब्धता संकट नहीं है। यह महंगा हो गया है..’’
कंपनी का मानना है कि उसकी विविध स्रोत रणनीति और ईंधन के लिए दीर्घकालिक अनुबंध इस प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे।
‘पैकेजिंग बैग’ लागत पर डागा ने कहा कि कंपनी देशभर में करीब 150 आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम करती है। बड़े खरीद आकार के कारण उसकी सौदेबाजी क्षमता मजबूत होती है।
डीजल कीमतों और मालभाड़ा लागत पर प्रबंधन सतर्क रहा और कहा कि इसका पूरा प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘ डीजल के प्रभाव के बारे में अभी कोई नहीं जानता। हमें इंतजार करना होगा। यह अगले महीने सामने आ सकता है।’’
कंपनी की क्षमता 20 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक हो चुकी है। इसने जनवरी-मार्च तिमाही में कुछ कीमतों में वृद्धि भी की है।
अल्ट्राटेक ने वित्त वर्ष 2027-28 तक 24 करोड़ टन प्रति वर्ष का लक्ष्य रखा है और आगे भी क्षमता विस्तार में निवेश जारी रखेगी।
डागा ने कहा, ‘‘ हम आने वाले समय में हर वर्ष लगभग 8,000-10,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना देखते हैं। भविष्य की पूंजीगत व्यय योजना पूरी तरह वित्तपोषित है और वृद्धि की कहानी बरकरार है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मात्रा वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर डागा ने कहा, ‘‘ हम दो अंकों की वृद्धि का लक्ष्य रखेंगे।’’
भाषा निहारिका
निहारिका

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