ऊर्जा कीमतें बढ़ने से भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ सकता है दबावः रेटिंग एजेंसियां

ऊर्जा कीमतें बढ़ने से भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ सकता है दबावः रेटिंग एजेंसियां

ऊर्जा कीमतें बढ़ने से भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ सकता है दबावः रेटिंग एजेंसियां
Modified Date: March 11, 2026 / 04:33 pm IST
Published Date: March 11, 2026 4:33 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी, मूडीज और फिच ने बुधवार को कहा कि कच्चे तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में तेजी, घरेलू ईंधन कीमतों में सीमित बढ़ोतरी और आयात पर अधिक निर्भरता के कारण भारत की सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों पर मार्जिन दबाव बढ़ रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तीन पेट्रोलियम विपणन कंपनियां देशभर के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंपों का संचालन करती हैं। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) शामिल हैं।

तीनों रेटिंग एजेंसियों ने अलग-अलग रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका एवं इजराइल के संयुक्त हमलों से इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का करीब आधा हिस्सा आयात करता है। इनमें से 30 से 55 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है।

देश का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 10 दिन की खपत के बराबर हैं जबकि वाणिज्यिक भंडार लगभग 65 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है।

अप्रैल, 2022 से ही देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लगभग स्थिर रही हैं।

मूडीज रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार के प्रभाव के कारण बढ़ती लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाता है और कंपनियों को अधिक लागत का बोझ खुद ही उठाना पड़ता है। इससे पेट्रोलियम कंपनियों के विपणन मार्जिन घटते हैं और परिचालन नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है।

फिच रेटिंग्स ने कहा कि ईरान से जुड़ी आपूर्ति में लंबा व्यवधान या होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने से पेट्रोलियम विपणन कंपनियों और गेल इंडिया लिमिटेड के नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सरकारी समर्थन के कारण उनकी रेटिंग को सहारा मिलता रहेगा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि यदि व्यवधान लंबा खिंचता है तो सरकार पहले की तरह एक बार फिर महंगाई नियंत्रण और कंपनियों की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।

पश्चिम एशिया से गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। सात मार्च को 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 60 रुपये बढ़ा दी गई।

फिच और मूडीज ने कहा कि बाजार मूल्य से कम कीमत पर एलपीजी बेचने से होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार बजटीय प्रावधानों के जरिये कर सकती है। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे के पैकेज की घोषणा की गई थी, जिसे मासिक किस्तों में जारी किया जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि निजी रिफाइनरी संचालित करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से शुरुआती दौर में इन्वेंट्री लाभ मिल सकता है, लेकिन यदि आपूर्ति बाधित रहती है तो रिफाइनरी संचालन पर दबाव पड़ सकता है।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा, ‘‘भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर बना रहेगा। हालांकि, रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से खरीद के जरिये आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की कुछ गुंजाइश है।’’

फिलहाल भारत का रूस से कच्चा तेल आयात लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन है, जबकि वेनेजुएला से आयात पिछले महीने फिर शुरू होकर करीब 1.42 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है।

एजेंसी ने कहा कि सरकार के निर्देशों और बढ़ती कीमतों के कारण इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। महंगाई के दबाव को काबू में रखने के लिए तीनों ईंधन खुदरा कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखनी पड़ सकती हैं। इससे कंपनियों के मार्जिन प्रभावित होने की आशंका है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में