पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती उत्पादन लागत से टेलीविजन उद्योग की बिक्री घटने की आशंका

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती उत्पादन लागत से टेलीविजन उद्योग की बिक्री घटने की आशंका

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती उत्पादन लागत से टेलीविजन उद्योग की बिक्री घटने की आशंका
Modified Date: April 5, 2026 / 02:07 pm IST
Published Date: April 5, 2026 2:07 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) टेलीविजन उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव गहराता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है। रैम की कीमतों में तेजी के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्लास्टिक और समुद्री ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है।

बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई देने लगा है। कई ग्राहक अब बड़े परदे वाले टेलीविजन की बजाय छोटे आकार के मॉडल चुन रहे हैं। इसके अलावा रुपये में कमजोरी के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है, जिससे खुदरा कीमतों में भी वृद्धि हुई है।

बड़ी कंपनियों ने अभी तक पूरी लागत वृद्धि ग्राहकों पर नहीं डाली है और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कुछ बोझ स्वयं वहन कर रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ता अपनी खरीद टाल रहे हैं। हालांकि उद्योग को उम्मीद है कि वर्ष के दूसरे हिस्से में त्योहारों के दौरान मांग में सुधार होगा।

सुपर प्लास्ट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अवनीत सिंह मारवाह ने कहा कि बढ़ती लागत के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और उद्योग में सस्ते विकल्पों की ओर रुझान के संकेत मिल रहे हैं।

उनके अनुसार, जो ग्राहक पहले 55 इंच का टेलीविजन लेने की सोच रहे थे, वे अब 50 इंच का मॉडल चुन रहे हैं, जबकि 65 इंच की जगह 55 इंच का विकल्प लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में 32 इंच का साधारण टेलीविजन, जिसकी कीमत पहले करीब 9,000 रुपये थी, अब लगभग 11,000 रुपये में बिक रहा है।

हायर इंडिया के अध्यक्ष एन एस सतीश ने कहा कि कुछ हद तक छोटे मॉडल की ओर रुझान दिख रहा है, लेकिन आसान किस्त योजनाएं बड़े परदे वाले टेलीविजन की मांग को बनाए रखने में मदद कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि कंपनी का लगभग आधा कारोबार मासिक किस्तों पर आधारित है, जिससे कीमत बढ़ने का असर कम महसूस होता है।

उन्होंने कहा कि कुछ उपभोक्ता अधिक किस्तें देकर बड़े टेलीविजन खरीद रहे हैं, जबकि कीमत को लेकर सतर्क ग्राहक छोटे विकल्प चुन रहे हैं।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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