ईसीएलजीएस 5.0 के तहत एसबीआई देगा 80,000 करोड़ रुपये तक का कर्जः चेयरमैन शेट्टी
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत एसबीआई देगा 80,000 करोड़ रुपये तक का कर्जः चेयरमैन शेट्टी
मुंबई, सात मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ‘आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0’ के तहत अपने ग्राहकों को 70,000-80,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज उपलब्ध करा सकता है। बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
शेट्टी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पात्र ग्राहकों की पहचान हो चुकी है और नए दिशानिर्देशों के अनुरूप यह ऋणसुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित कारोबारों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत एयरलाइंस क्षेत्र के लिए अलग से 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जबकि शेष राशि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य पात्र उधारकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।
शेट्टी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर व्यापक है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने ईसीएलजीएस 5.0 को एक सक्रिय कदम बताते हुए कहा कि भले ही सभी इकाइयां इसका उपयोग न करें, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह सुविधा उपलब्ध रहेगी।
उन्होंने बताया कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए निदेशक मंडल की मंजूरी और डिजिटल प्रक्रियाओं का एकीकरण जैसे मुद्दे अगले 8-10 दिनों में सुलझ जाने की उम्मीद है। इसके लिए ‘जन समर्थ’ पोर्टल के जरिए प्रक्रियाओं को लागू किया जा रहा है।
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का आकलन है कि बैंकिंग प्रणाली में 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थी इस योजना से संभावित रूप से लाभ उठा सकते हैं।
शेट्टी ने कोविड-19 के दौरान शुरू की गई इस योजना के पिछले चरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके तहत चूक की दर एमएसएमई क्षेत्र की औसत चूक दर से कम रही है।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि योजना का आकार बैंकों के मौजूदा ऋण जोखिम और प्रभावित क्षेत्रों की संभावित मांग को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत ऋण की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है, जबकि एयरलाइंस के लिए इसे सात वर्ष रखा गया है, क्योंकि इस क्षेत्र की रिकवरी अवधि अपेक्षाकृत लंबी होती है।
नागराजू ने कहा कि सभी एमएसएमई इस योजना के तहत पात्र हैं जबकि बिजली, दूरसंचार, चीनी और शैक्षणिक संस्थानों जैसे कुछ गैर-एमएसएमई क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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