सेबी ने एसडीआई, म्यूनिसिपल बॉन्ड के नियामकीय ढांचे में संशोधन को मंजूरी दी
सेबी ने एसडीआई, म्यूनिसिपल बॉन्ड के नियामकीय ढांचे में संशोधन को मंजूरी दी
मुंबई, 19 जून (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को प्रतिभूतीकृत ऋण साधन (एसडीआई) और म्युनिसिपल बॉन्ड से जुड़े नियामकीय ढांचे में संशोधनों को मंजूरी दी। इस कदम का उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के साथ तालमेल बैठाना, परिचालन दक्षता बढ़ाना और इन बाजारों के विकास को प्रोत्साहित करना है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बैठक में संशोधित ढांचे के तहत बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को एकल परिसंपत्ति प्रतिभूतिकरण सौदों में मौजूदा 25 प्रतिशत ‘उधारकर्ता एकाग्रता’ सीमा से छूट दी गई।
हालांकि, ऐसी स्थिति में जारीकर्ता को निर्गम दस्तावेज में एकाग्रता जोखिम का स्पष्ट खुलासा करना होगा ताकि निवेशकों को संबंधित जोखिमों की जानकारी मिल सके।
नियामक ने प्रतिभूतिकृत परिसंपत्तियों से जुड़े खुलासा और रिपोर्टिंग नियमों में भी बदलाव किया है। इसके तहत ऋण का प्रबंधन करने वाली एजेंसी यानी ऋण सेवा प्रदाता (सर्विसर) को ही नियमित रिपोर्टिंग और खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा, सेबी ने म्युनिसिपल बॉन्ड नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी है, ताकि नगर निकायों के बॉन्ड बाजार को विकसित किया जा सके। नए प्रावधानों के तहत नगरपालिकाएं विशेष परियोजनाओं के मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्त के लिए धन जुटा सकेंगी।
इन नियमों के मुताबिक, नगरपालिकाओं को निर्गम दस्तावेज में मौजूदा ऋणदाताओं और पुनर्वित्त किए जा रहे कर्ज का विवरण देना होगा, जिससे निवेशक उनकी वित्तीय स्थिति और तरलता जोखिम का आकलन कर सकें।
सेबी ने दो या अधिक नगरपालिकाओं द्वारा समूह आधारित वित्तपोषण व्यवस्था (पूल्ड फाइनेंस) के जरिए धन जुटाने के लिए भी दिशा-निर्देश स्पष्ट किए हैं। इसमें विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) और नगरपालिकाओं के बीच समझौते, एस्क्रो खाते और भुगतान व्यवस्था जैसे परिचालन पहलुओं के खुलासे शामिल होंगे।
खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नियामक ने जारीकर्ताओं को वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, रक्षा कर्मियों (सेवारत और सेवानिवृत्त), उनके आश्रितों और खुदरा निवेशकों को अतिरिक्त ब्याज या निर्गम मूल्य पर छूट जैसे प्रोत्साहन देने की अनुमति दी है।
निजी नियोजन के जरिए जारी म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए अंकित मूल्य 10,000 रुपये या एक लाख रुपये तय किया जा सकेगा। 10,000 रुपये अंकित मूल्य वाले बॉन्ड की परिपक्वता निश्चित होगी और इनमें जटिल संरचनाएं नहीं होंगी।
इसके अलावा, सेबी ने सार्वजनिक निर्गम से जुड़े विज्ञापनों के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के उपयोग की अनुमति दी है और निर्गम के बाद अनुपालन समयसीमा में ढील दी है। अर्द्धवार्षिक बिना ऑडिट वाले वित्तीय नतीजे जमा करने की समयसीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन और वार्षिक ऑडिट नतीजों के लिए 60 दिनों से बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है।
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने इन फैसलों पर कहा कि भारत में नगरपालिका बॉन्ड बाजार के विस्तार में फिलहाल मांग से ज्यादा आपूर्ति बड़ी चुनौती है, क्योंकि नगरपालिकाएं बाजार से धन जुटाने के लिए आगे नहीं आ रही हैं।
उन्होंने कहा, “अभी यह मांग का नहीं बल्कि आपूर्ति का मुद्दा है। नगरपालिकाएं वास्तव में बॉन्ड जारी करने के लिए आगे नहीं आ रही हैं। यदि वे आगे आती हैं, तो निवेशक इसमें रुचि दिखाएंगे।”
पांडेय ने कहा कि नगरपालिका बॉन्ड बाजार अभी शुरुआती चरण में है और इसके विकास के लिए नियामकीय स्पष्टता, नगरपालिकाओं की क्षमता निर्माण और निवेशकों में जागरूकता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि खासकर छोटी नगरपालिकाओं के लिए ढांचे को अधिक सक्षम बनाने और सामूहिक वित्तपोषण जैसे माध्यमों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण

Facebook


