सेबी ने वायदा-विकल्प सौदों के निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा

सेबी ने वायदा-विकल्प सौदों के निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा

सेबी ने वायदा-विकल्प सौदों के निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा
Modified Date: September 12, 2026 / 03:18 pm IST
Published Date: September 12, 2026 3:18 pm IST

नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शनिवार को सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प सौदों के समाप्ति दिवस पर निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा।

यह प्रस्ताव हाल में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (सीएएस) की समीक्षा के बाद रखा गया है।

सेबी ने परामर्श पत्र में निपटान मूल्य तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं। पहला विकल्प लगातार कारोबार वाले सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस में हुए सौदों के आधार पर संयुक्त मात्रा भारित औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) तय करना है। दूसरा विकल्प मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी पद्धति को ही जारी रखना है।

ये प्रस्ताव बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद रखे गए हैं। बाजार प्रतिभागियों ने समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान के लिए सीएएस के तहत तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल को लेकर प्रतिक्रिया दी थी।

सेबी को मिली प्रतिक्रियाओं में डेरिवेटिव सौदों का निपटान सीएएस के जरिए तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के आधार पर करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।

सेबी ने तीन अगस्त से इक्विटी नकद बाजार में सीएएस व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य प्रतिभूतियों का क्लोजिंग प्राइस तय करना है। मौजूदा व्यवस्था के तहत सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस ही समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य का आधार बनता है।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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