सेबी ने एफपीआई निपटान नियमों में ढील दी, ‘सोशल इम्पैक्ट फंड’ में न्यूनतम निवेश सीमा घटायी
सेबी ने एफपीआई निपटान नियमों में ढील दी, ‘सोशल इम्पैक्ट फंड’ में न्यूनतम निवेश सीमा घटायी
मुंबई, 23 मार्च (भाषा) सेबी के निदेशक मंडल ने सोमवार को एफपीआई निपटान नियमों में छूट देने का निर्णय किया। इसके तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एक ही दिन में नकदी बाजार में किए गए लेन-देन के लिए अलग-अलग भुगतान करने के बजाय ‘नेट फंड’ की अनुमति दी गयी है। इस कदम का उद्देश्य परिचालन दक्षता बढ़ाना और उनके लिए कोष की लागत को कम करना है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए ‘नेट फंड’ या ‘नेटिंग ऑफ फंड’ से आशय नकद बाजार में उसी दिन खरीद लेनदेन को वित्तपोषित करने के लिए बिक्री लेनदेन से प्राप्त आय का उपयोग करने की अनुमति से है। इससे एफपीआई को केवल शुद्ध निधि दायित्व को पूरा करना आवश्यक होता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने निदेशक मंडल की बैठक के बाद एक बयान में कहा कि यह प्रस्ताव 31 दिसंबर, 2026 को या उससे पहले लागू किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे खुदरा भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एआईएफ के ‘सोशल इम्पैक्ट फंड’ में व्यक्तिगत निवेशकों के न्यूनतम निवेश मूल्य को मौजूदा दो लाख रुपये से घटाकर 1,000 रुपये किया गया है।
साथ ही, बोर्ड ने योजना के जीवनकाल के बाद एआईएफ को सीमित धनराशि रखने की अनुमति देने का निर्णय लिया ताकि समापन प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके और पंजीकरण ‘सरेंडर’ करने में सुविधा हो।
एफपीआई निपटान नियमों के संबंध में, सेबी ने कहा कि वर्तमान में, एफपीआई अपने लेन-देन को ‘कस्टोडियन’ के साथ सकल आधार पर निपटाते हैं। इसके परिणामस्वरूप एफपीआई के लिए अतिरिक्त लागत आती हैं, जिनमें वित्त पोषण लागत और विदेशी मुद्रा ‘स्लीपेज’ शामिल हैं।
विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) में होने वाला ‘स्लीपेज’, मुद्रा व्यापार की अपेक्षित कीमत और वास्तविक कीमत के बीच का अंतर होता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने कहा कि इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए और परिचालन दक्षता बढ़ाने तथा एफपीआई के लिए वित्तपोषण की लागत कम करने के उद्देश्य से, यह निर्णय लिया गया है कि एफपीआई द्वारा नकद बाजार में किए गए सीधे लेन-देन के लिए कोष के शुद्ध निपटान की अनुमति दी जाए। यानी, ऐसे लेन-देन जिनमें निपटान चक्र की प्रतिभूति में केवल खरीद या बिक्री का लेन-देन होता है, दोनों नहीं।
सेबी ने कहा, ‘‘इस प्रस्ताव से एफपीआई के लिए वित्तपोषण की लागत कम होने की उम्मीद है…।’’
इस बीच, बोर्ड ने एआईएफ के नियमों में संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत एआईएफ के सोशल इम्पैक्ट फंड में व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा न्यूनतम निवेश मूल्य को मौजूदा दो लाख रुपये से घटाकर 1,000 रुपये किया गया है।
इससे सेबी (पूंजी निर्गमन एवं खुलासा आवश्यकताएं) विनियमन, 2018 के तहत जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स के अभिदान के लिए न्यूनतम आवेदन आकार की आवश्यकता और ‘सोशल इम्पैक्ट फंड’ में व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा निवेश के न्यूनतम मूल्य की आवश्यकता में सामंजस्य स्थापित होगा। इससे ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ में खुदरा निवेशकों की व्यापक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, सेबी ने वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) को योजना की अवधि समाप्त होने के बाद भी सीमित धनराशि रखने की अनुमति देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे समापन प्रक्रिया आसान हो जाएगी और पंजीकरण ‘सरेंडर’ करने में सुविधा होगी।
भाषा रमण अजय
अजय

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