बीज कंपनियों के पास खरीफ के लिए अतिरिक्त भंडार उपलब्ध, आपूर्ति की चिंता: एफएसआईआई
बीज कंपनियों के पास खरीफ के लिए अतिरिक्त भंडार उपलब्ध, आपूर्ति की चिंता: एफएसआईआई
(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) देश की निजी बीज कंपनियों ने खरीफ फसल सत्र के लिए 20-30 प्रतिशत अतिरिक्त भंडार रखा है, लेकिन इस साल अल-नीनों के कारण मानसून के कमजोर और देरी से आने के खतरे के बीच बारिश की कमी वाले मुख्य इलाकों में समय पर बीज पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) ने यह बात कही।
एफएसआईआई के चेयरमैन अजय राणा ने कहा कि मक्का, धान और मोटे अनाज (मिलेट्स) के रिकॉर्ड बीज उत्पादन से इस वर्ष उद्योग पूरी तरह तैयार है। हाल ही में एक हजार किसानों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 75 प्रतिशत किसान पहले ही बीज खरीद चुके हैं, जबकि 25 प्रतिशत किसान मानसून का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में बुवाई की अवधि समाप्त होने से पहले अतिरिक्त भंडार वाले क्षेत्रों से प्रभावित जिलों तक बीज पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
राणा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम आम तौर पर 15 से 20 प्रतिशत बफर रखने की योजना बनाते हैं, लेकिन इस वर्ष बेहतर उत्पादन के कारण कई कंपनियों के पास 20 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त बीज उपलब्ध है।’’
उन्होंने कहा कि चुनौती बीज की उपलब्धता नहीं, बल्कि सही समय पर सही क्षेत्रों तक उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, खरीफ मौसम के लिए प्रमाणित बीज की उपलब्धता 192.43 लाख क्विंटल है, जबकि आवश्यकता लगभग 173 लाख क्विंटल है। इस प्रकार 11.2 प्रतिशत अतिरिक्त बीज उपलब्ध है। निजी क्षेत्र देश में 10 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से लगभग 70 प्रतिशत बीज की आपूर्ति करता है और उसने इसके अतिरिक्त भी पर्याप्त भंडार तैयार किया है।
सरकार ने मानसून के देरी से आने के कारण प्रभावित होने की आशंका वाले 12 राज्यों के 315 जिलों की पहचान की है।
उन्होंने कहा, ‘‘अल नीनो हमारी खेती, खासकर खरीफ़ के मौसम के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसका असर खासकर उन इलाकों पर पड़ेगा जहां सिंचाई की सुविधा कम है।’’
राणा ने कहा कि अधिकतर फसलों में किसान अब जल्दी और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं तथा उद्योग ने उसी अनुरूप बीज का भंडारण किया है।
एफएसआईआई की सदस्य कंपनियों ने रिमोट सेंसिंग टूल्स और डिजिटल मंचों की मदद से संवेदनशील जिलों की पहचान कर वास्तविक समय में निगरानी शुरू कर दी है।
राणा ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती अतिरिक्त भंडार वाले क्षेत्रों से जरूरत वाले जिलों तक बीज पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
भाषा यासिर अजय
अजय

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