कच्चे तेल के दाम में उछाल से सेंसेक्स 1,837 अंक फिसला, निफ्टी टूटकर 22,512 अंक पर

कच्चे तेल के दाम में उछाल से सेंसेक्स 1,837 अंक फिसला, निफ्टी टूटकर 22,512 अंक पर

कच्चे तेल के दाम में उछाल से सेंसेक्स 1,837 अंक फिसला, निफ्टी टूटकर 22,512 अंक पर
Modified Date: March 23, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: March 23, 2026 5:23 pm IST

मुंबई, 23 मार्च (भाषा) स्थानीय शेयर बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट आई और बीएसई सेंसेक्स 1,837 अंक का गोता लगा गया, जबकि एनएसई निफ्टी 602 अंक लुढ़क गया। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त होने के कोई संकेत नहीं होने के साथ वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख से घरेलू बाजार में गिरावट रही।

युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच गया है। इसके कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर पूंजी निकासी और रुपये की विनिमय दर में गिरावट को देखते हुए निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72,696.39 अंक पर बंद हुआ। कारोबार दौरान, एक समय यह 1,974.52 अंक का गोता लगाकर 72,558.44 अंक पर आ गया था।

पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत लुढ़ककर 22,512.65 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों में से टाइटन में सबसे अधिक 6.24 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटरग्लोब एविएशन, टाटा स्टील और एचडीएफसी बैंक भी प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।

दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा शामिल हैं।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.97 प्रतिशत चढ़कर 113.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच कर गया।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे मौजूदा गिरावट का रुख जारी रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है….।’’

मिश्रा ने कहा कि तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर निकासी और रुपये के मूल्य में गिरावट ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति को काफी हद तक प्रभावित किया है।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित कमी को लेकर चिंताओं के बीच एशियाई बाजारों में कमजोर रुख के साथ घरेलू बाजारों में भारी गिरावट आई। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी के बाद निवेशकों का रुख सतर्क है।’’

उन्होंने कहा कि वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि ने बढ़ती मुद्रास्फीति और राजकोषीय चिंताओं का संकेत दिया है। जबकि रुपये के अबतक के सबसे निचले स्तर पर आने से बाजारों पर और दबाव पड़ा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी शुरू हो गई।

मझोली कंपनियों से जुड़ा बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 3.82 प्रतिशत टूटा जबकि छोटी कंपनियों का स्मॉलकैप 3.66 प्रतिशत के नुकसान में रहा।

बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में से 3,798 शेयर नुकसान में रहे जबकि 635 में तेजी रही। वहीं 123 के भाव अपरिवर्तित रहे।

बीएसई सेंसेक्स 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से 8,590.8 अंक यानी 10.56 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि निफ्टी 2,666 अंक यानी 10.58 प्रतिशत टूटा है।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भारी गिरावट के साथ बंद हुए।

यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार में भारी गिरावट देखी गई। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को काफी नुकसान में रहे थे।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाले हैं।

सेंसेक्स शुक्रवार को 325.72 अंक चढ़कर 74,532.96 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी 112.35 अंक की तेजी के साथ 23,114.50 अंक पर रहा था।

भाषा रमण अजय

अजय


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