नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता हो रही खराब: नीति उपाध्यक्ष

नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता हो रही खराब: नीति उपाध्यक्ष

नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता हो रही खराब: नीति उपाध्यक्ष
Modified Date: July 23, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: July 23, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने बृहस्पतिवार को कहा कि नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता के साथ देश में इसके असंतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है और फसल उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

उन्होंने उर्वरक उपयोग के लिए निर्धारित एनपीके (नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश) अनुपात को बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।

इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में लाहिड़ी ने कहा कि भारत में औसत एनपीके अनुपात करीब 9.8:3.7:1 है, जबकि वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित अनुपात 4:2:1 है। उन्होंने कहा कि यह असंतुलन नाइट्रोजन के अत्यधिक इस्तेमाल को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ …देश में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (एनपीके) का औसत अनुपात लगभग 9.8:3.7:1 है, जो अनुशंसित 4:2:1 अनुपात से काफी अधिक अलग है। यह दर्शाता है कि यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता है।’’

लाहिड़ी ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना और फॉस्फेट एवं पोटाश आधारित उर्वरकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना मिट्टी के स्वास्थ्य और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग के लिए आवश्यक है।

लाहिड़ी ने कहा कि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारी असंतुलन सरकार की अलग-अलग सब्सिडी नीतियों के कारण पैदा हुआ है, जिसके चलते यूरिया कृत्रिम रूप से सस्ता उपलब्ध होता है।

उन्होंने कहा कि अन्य पोषक तत्वों की तुलना में नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। हालांकि, इस असंतुलन को दूर करने के प्रयास सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के कारण धीमे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय कृषि को कच्चे कृषि उत्पादों से मूल्यवर्धित उत्पादों की ओर, बिखरी हुई खेती से मजबूत किसान उत्पादक संस्थानों की ओर और अधिक कच्चे माल आधारित खेती से पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि की ओर बढ़ना होगा।

लाहिड़ी ने कहा कि भारतीय कृषि आज भी खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और व्यापक आर्थिक स्थिरता का आधार बनी हुई है, लेकिन 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने बाकी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘विकसित भारत यात्रा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कृषि क्षेत्र आज भी करीब 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है, इसलिए किसानों की समृद्धि बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी हुई है।’’

लाहिड़ी ने कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान देते हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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