एसएंडपी ने भारत की साख रेटिंग ‘बीबीबी’ पर बरकरार रखी, परिदृश्य स्थिर

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एसएंडपी ने भारत की साख रेटिंग ‘बीबीबी’ पर बरकरार रखी, परिदृश्य स्थिर

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 08:13 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 08:13 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को भारत की संप्रभु साख रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी’ पर बरकरार रखा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत गतिशील एवं तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और यहां नीतिगत स्थिरता तथा बुनियादी ढांचे में ऊंचा निवेश जारी है।

अगस्त, 2025 में एसएंडपी ने 18 साल के अंतराल के बाद भारत की दीर्घकालिक संप्रभु साख रेटिंग को ‘बीबीबी-माइनस’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी’ किया था।

एसएंडपी ने कहा कि सार्वजनिक निवेश और उपभोक्ता मांग अगले दो-तीन वर्षों में भारत की ठोस आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को समर्थन देंगे। उसने नीतियों में निरंतरता की उम्मीद जताते हुए कहा कि इससे आर्थिक सुधारों और राजकोषीय मजबूती को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने कहा कि केंद्र में गठबंधन सरकार होने के बावजूद लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास पर्याप्त बहुमत होना आर्थिक सुधारों को लागू करने के सरकार के प्रयासों के लिए अनुकूल है।

एसएंडपी ने भारत की दीर्घकालिक ‘बीबीबी’ और अल्पकालिक ‘ए-2’ संप्रभु साख रेटिंग बरकरार रखी। दीर्घकालिक रेटिंग का परिदृश्य स्थिर है।

‘बीबीबी’ निवेश-योग्य श्रेणी की रेटिंग है। इसका मतलब है कि देश के पास अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताएं पूरी करने की पर्याप्त क्षमता है। लेकिन ऊंची रेटिंग वाले देशों की तुलना में प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों के प्रति इसकी संवेदनशीलता अधिक है।

एसएंडपी ने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और कृषि क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है। हालांकि, आर्थिक बुनियाद मजबूत रहने और अगले दो-तीन वर्षों में तेज वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है।

एजेंसी ने कहा कि सरकार की कमजोर राजकोषीय स्थिति, कर्ज का ऊंचा बोझ और प्रति व्यक्ति कम सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भारत की रेटिंग पर दबाव डालने वाले कारक हैं।

एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत बढ़ी थी। एजेंसी ने अगले तीन वर्षों में औसत वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

एसएंडपी ने कहा कि अगले 24 महीनों में आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के साथ स्थिर राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियां सरकार के ऊंचे कर्ज और ब्याज बोझ को सीमित करने में मदद करेंगी।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता में कमी का सामना कर रहा है। बेहतर भौतिक बुनियादी ढांचा अधिक निजी निवेश और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए जरूरी है।

एजेंसी ने कहा कि सरकार पूंजीगत व्यय बढ़ाकर इस कमी को दूर करने का लगातार प्रयास कर रही है। इसके साथ ही सरकार ने सब्सिडी पर बजट खर्च का हिस्सा कम किया है और राजकोषीय मजबूती की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

हालांकि, देश को ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण निकट अवधि में मुद्रास्फीति संबंधी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एसएंडपी को मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लक्ष्य दायरे में रहने की उम्मीद है।

इस महीने की शुरुआत में फिच रेटिंग्स ने भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी-माइनस’ पर बरकरार रखा था।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय