सांख्यिकी मंत्रालय ने आईआईपी संकलन के लिए श्रृंखला-आधारित पद्धति को अपनाने का प्रस्ताव दिया

सांख्यिकी मंत्रालय ने आईआईपी संकलन के लिए श्रृंखला-आधारित पद्धति को अपनाने का प्रस्ताव दिया

सांख्यिकी मंत्रालय ने आईआईपी संकलन के लिए श्रृंखला-आधारित पद्धति को अपनाने का प्रस्ताव दिया
Modified Date: January 13, 2026 / 09:01 pm IST
Published Date: January 13, 2026 9:01 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संकलन के लिए ‘श्रृंखला-आधारित पद्धति’ की ओर बढ़ने का प्रस्ताव दिया है।

मंत्रालय इस समय व्यापक आर्थिक आंकड़ों के आधार वर्ष में संशोधन की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

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एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि आधार वर्ष को संशोधित करने की इस प्रक्रिया में मंत्रालय कार्यप्रणालियों की समीक्षा कर रहा है और नए डेटा स्रोतों की खोज कर रहा है। साथ ही विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उपयोगकर्ताओं तथा अन्य हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद जरूरी बदलावों को शामिल किया जा रहा है।

पारंपरिक रूप से आईआईपी का संकलन ‘स्थिर-आधार लैस्पियर्स पद्धति’ का इस्तेमाल करके किया जाता था, जिसमें आधार वर्ष के संशोधन तक विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों के भारांक अपरिवर्तित रहते थे।

बयान में कहा गया कि मांग, तकनीकी परिवर्तनों और नीतिगत बदलावों के कारण उत्पादन के तरीकों में बदलाव आता है, जिससे कुछ उद्योगों का विस्तार होता है, जबकि कुछ अन्य उद्योग कम हो जाते हैं या समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही पूरी तरह से नए उद्योग या किसी उद्योग के भीतर नई उत्पादन लाइनें उभर कर सामने आती हैं।

इसमें कहा गया कि इसलिए स्थिर भारांक धीरे-धीरे कम प्रासंगिक हो जाते हैं, जिससे सूचकांकों का प्रभाव बदल जाता है।

आईआईपी संकलन की श्रृंखला-आधारित पद्धति इन परिवर्तनों को शामिल करके बेहतर सटीकता प्रदान करती है, जिससे भारांकों में होने वाली वार्षिक वृद्धि और कमी हालिया उत्पादन संरचना को सही ढंग से दर्शा सकती है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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