मिल पर चीनी कीमतों में 30 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा भाव में कोई बदलाव नहीं

मिल पर चीनी कीमतों में 30 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा भाव में कोई बदलाव नहीं

मिल पर चीनी कीमतों में 30 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा भाव में कोई बदलाव नहीं
Modified Date: August 31, 2026 / 03:21 pm IST
Published Date: August 31, 2026 3:21 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) सरकार के विभिन्न उपायों से सोमवार को मिल पर चीनी की कीमतें लगभग 30 प्रतिशत गिरकर 47 रुपये प्रति किलोग्राम रह गईं। मिल पर चीनी की कीमतें 18 अगस्त को 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर थीं। हालांकि, उद्योग सूत्रों का कहना है कि इस गिरावट का असर अभी तक खुदरा बाजार में नहीं दिखा है।

जहां मिल दरों में गिरावट का असर थोक बाजार में लगभग तुरंत दिखता है, वहीं खुदरा कीमतों में बदलाव में समय लगता है।

सूत्रों ने बताया कि जिन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ऊंची दरों पर स्टॉक खरीदा था, वे नुकसान में इसे बेचना नहीं चाहते और जब तक उनका मौजूदा स्टॉक खत्म नहीं हो जाता, वे उसे पुरानी दरों पर ही बेचते रहेंगे।

आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी के 10-15 बैग होते हैं, जिनमें से हर एक का वज़न 50 किलोग्राम होता है। जब कम दर पर नया स्टॉक खरीदा जाएगा, तभी खुदरा कीमतों में उसी हिसाब से बदलाव होगा।

चीनी उद्योग के एक सूत्र ने कहा, ‘‘खुदरा कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लगते हैं।’’

चीनी की मिल कीमतों में गिरावट सरकार के उस फैसले के बाद आई है जिसमें उन मिलों को निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है। अनुमान है कि अगले दो माह में लगभग 3-3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आएगी।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले (थोक उपभोक्ता) जिन्होंने 15 दिन से ज्यादा समय से स्टॉक रखा हुआ था, उन्होंने सरकार के नए नियमों का पालन करने के लिए अपना स्टॉक कम कर दिया है। एक सितंबर से, महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं को लगातार 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक रखने की इजाजत नहीं होगी।

हर मिल द्वारा थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली मासिक मात्रा — चाहे सीधे हो या डीलर के ज़रिये — की अब जांच की जाएगी।

चीनी उद्योग के सूत्रों ने बताया कि एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर, और मिल और खुदरा कीमतों के बीच 7-8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होना आम बात है।

आयात खोलने के अलावा, सरकार ने थोक ग्राहकों और डीलर के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त कर दिया है और पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

केंद्र सरकार ने कीमतों को ‘बढ़ाने’ के लिए मिलों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है — जबकि विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है।

सालाना घरेलू मांग लगभग 280-285 लाख टन आंकी गई है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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