टिकाऊ विमान ईंधन से किसानों की आय में हो सकती है प्रति हेक्टयर 29,000 रुपये की वृद्धि: उद्योग निकाय

टिकाऊ विमान ईंधन से किसानों की आय में हो सकती है प्रति हेक्टयर 29,000 रुपये की वृद्धि: उद्योग निकाय

टिकाऊ विमान ईंधन से किसानों की आय में हो सकती है प्रति हेक्टयर 29,000 रुपये की वृद्धि: उद्योग निकाय
Modified Date: September 28, 2026 / 04:34 pm IST
Published Date: September 28, 2026 4:34 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) हरित विमान ईंधन के उपयोग से न केवल विमानन क्षेत्र को पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी बल्कि किसानों की आय में प्रति हेक्टेयर करीब 160-300 डॉलर (15,000-29,000 रुपये) की वृद्धि हो सकती है। टिकाऊ विमान ईंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने सोमवार को यह संभावना जताई।

‘टिकाऊ विमान ईंधन’ (एसएएफ) पारंपरिक विमान ईंधन का कम कार्बन उत्सर्जन वाला एक विकल्प है, जिसे नवीकरणीय और अपशिष्ट पदार्थों से बनाया जाता है। यह पारंपरिक विमान ईंधन के मुकाबले पूरे जीवन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 80 प्रतिशत तक कम करता है।

एसएएफ पर राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो-दिवसीय ‘एसएएफ कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026’ कार्यक्रम में एसएएफ एसोसिएशन के महासचिव रोहित कुमार ने कहा, ‘‘एसएएफए उद्योग के नेतृत्व में सहयोग और वैश्विक साझेदारी के जरिये पूरी एसएएफ मूल्य श्रृंखला को एक साथ लाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा ध्यान नीति-निर्माताओं, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, कच्चा माल उपलब्ध कराने वालों और खरीदारों को जोड़कर व्यावहारिक अवसर पैदा करने पर है।’’

एसएएफ एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 25 से अधिक देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि और 200 से अधिक कंपनियां शामिल हो रही हैं।

इस मौके पर एसएएफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और इंडियन ऑयल के पूर्व शोध एवं विकास निदेशक डॉ. आलोक शर्मा ने कहा कि उत्पादन का विस्तार आपूर्ति पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘एसएएफ का बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए भरोसेमंद कच्चे माल, प्रौद्योगिकी की तैयारी, वित्तपोषण, प्रमाणन, बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धताओं की जरूरत होगी।’’

एसएएफ एसोसिएशन का अनुमान है कि टिकाऊ विमान ईंधन के उपयोग से न केवल विमानन क्षेत्र को पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी बल्कि किसानों की आय में प्रति हेक्टेयर करीब 160-300 डॉलर (15,000-29,000 रुपये) की वृद्धि हो सकती है।

उद्योग निकाय के मुताबिक, भारत 2050 तक सालाना करीब चार करोड़ टन एसएएफ का उत्पादन कर सकता है, जो संभावित वैश्विक उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत होगा।

ओमान के राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अल शिबनी ने सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का एसएएफ बदलाव ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में सहयोग के महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मजबूत भारत-ओमान साझेदारी टिकाऊ विमानन समाधान विकसित करने और स्वच्छ ऊर्जा परिवेश को मजबूत करने में मदद कर सकती है। एसएएफ को अपनाने और टिकाऊ विमानन भविष्य के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण होगा।’’ देश में करीब 1.5 अरब लीटर गन्ना आधारित एथनॉल की उपलब्धता से ‘अल्कोहल-टू-जेट’ ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, भारत में सालाना 2.9 से 3.0 करोड़ टन खाद्य तेल की खपत से 18-26 लाख टन ‘इस्तेमाल हो चुका खाद्य तेल’ (यूसीओ) उपलब्ध हो सकता है। हालांकि, इसका बहुत छोटा हिस्सा ही अधिकृत संग्रह केंद्रों तक पहुंचता है।

भारत में पहले से चार आईएससीसी-कोर्सिया (इंटरनेशनल सस्टेनेबिलिटी एंड कॉर्बन सर्टिफिकेशन-कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन) प्रमाणित सह-प्रसंस्करण संयंत्र हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 1,06,500 टन है। अगला कदम इस व्यवस्था को खेत और रसोई स्तर तक ले जाना है, ताकि कार्बन अर्थव्यवस्था विश्वसनीय बनी रहे और कच्चा माल उपलब्ध कराने वालों को उचित भुगतान मिल सके।

आईएससीसी-कोर्सिया एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता-प्राप्त प्रमाणन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ विमान ईंधन के सत्यापन के जरिये विमानन क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी सुनिश्चित करने में मदद करना है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एसएएफ के मिश्रण का संकेतात्मक लक्ष्य के तहत 2027 में एक प्रतिशत, 2028 में दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत रखा गया है। इसके साथ एसएएफ की मांग करीब 46,000 टन से बढ़कर लगभग 2.5 लाख टन होने की उम्मीद है।

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अनुमान के अनुसार, भारत में विमान ईंधन की मांग 2024 में करीब 1,92,000 बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2031 तक 2,77,000 बैरल प्रतिदिन हो सकती है।

दो दिवसीय सम्मेलन में कंपनियों के बीच (बी2बी) और सरकार और कंपनियों के बीच (बी2जी) बैठकें, समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर, तकनीकी कार्यशालाएं तथा सीओआरएसआईए और एसएएफ-जैव अर्थव्यवस्था पर परिचर्चाएं होंगी।

इस मौके पर सम्मेलन में एसएएफ के यूट्यूब चैनल ‘सैफटाइम्स डॉट कॉम’ की भी शुरुआत की गई।

भाषा

रमण प्रेम अजय

अजय


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