कर नीति पर चर्चा क्षेत्रीय हितों से आगे बढ़कर होनी चाहिए : सीतारमण
कर नीति पर चर्चा क्षेत्रीय हितों से आगे बढ़कर होनी चाहिए : सीतारमण
बेंगलुरु, 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि कर नीति पर चर्चा क्षेत्रीय हितों से आगे बढ़कर होनी चाहिए और भारत की अर्थव्यवस्था की व्यापक जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसमें ऐसी व्यवस्था बनाना शामिल है जो निष्पक्ष एवं विश्वसनीय हो तथा निवेश और नवाचार को बढ़ावा दे।
‘न्यू एज टैक्सेशन’ विषय पर यहां आयोजित आठवें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए कर सुधारों का उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना, मुकदमेबाजी कम करना और करदाताओं को अधिक निश्चितता देना था।
इस कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन ने किया।
उन्होंने कर विशेषज्ञों से अपने तात्कालिक हितों से आगे बढ़कर अपनी सिफारिशों के व्यापक प्रभाव पर विचार करने का आग्रह करते हुए कहा, “बेहतर कर नीति पर चर्चा क्षेत्रीय हितों से आगे बढ़कर होनी चाहिए।”
सीतारमण ने कहा कि सरकार ने स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) से जुड़े प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया है, सीमा बढ़ाई है और अनावश्यक आपराधिक प्रावधानों को कम किया है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक अनुपालन को सुगम बनाना है।
उन्होंने कहा, “ स्वैच्छिक अनुपालन को आसान बनाएं और प्रवर्तन क्षमता का इस्तेमाल केवल उन मामलों में करें, जहां वास्तव में इसकी जरूरत हो।”
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘विवाद से विश्वास’ योजना और 2024 में विभागीय अपील के लिए मौद्रिक सीमा बढ़ाकर भी कर संबंधी मुकदमेबाजी कम करने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील की सीमा बढ़ाकर 60 लाख रुपये, उच्च न्यायालयों के समक्ष दो करोड़ रुपये और उच्चतम न्यायालय के समक्ष पांच करोड़ रुपये की गई है।
प्रत्यक्ष कराधान के बारे में उन्होंने 2019 में कॉरपोरेट कर घटाकर 22 प्रतिशत किए जाने और 2025 में व्यक्तिगत आयकर ढांचे को तर्कसंगत बनाए जाने का उल्लेख किया।
सीतारमण ने नए आयकर कानून का भी उल्लेख किया, जिसने 1961 के कानून का स्थान लिया है। उन्होंने कहा कि नए कानून का उद्देश्य अधिक संक्षिप्त और सरल संहिता के जरिये अधिक स्पष्टता प्रदान करना है।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पर सीतारमण ने कहा कि 2017 में लागू होने के बाद अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में और सुधार किए गए हैं, जिसमें 2025 में दरों को तर्कसंगत बनाना भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली अगली बैठक में प्रक्रियागत सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा।
जीएसटी सुधारों के अगले चरण को ‘जीएसटी 3.0’ कहे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “अभी 3.0 तक नहीं पहुंचे हैं। हम दूसरे चरण में ही यह कर रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय कराधान पर सीतारमण ने कहा कि भारत ने मॉरीशस, सिंगापुर और साइप्रस के साथ कर संधियों में फिर से बातचीत की है, ताकि स्रोत देश के रूप में पूंजीगत लाभ पर कर लगाने का उसका अधिकार बहाल हो सके।
उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उन्होंने कहा कि डिजिटल कंपनियों, ऑनलाइन डिजिटल परिसंपत्तियों, क्लाउड सेवाओं और सीमा-पार लेनदेन पर कराधान की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जरूरत है। खासकर इसलिए क्योंकि कर संबंधी उपाय भविष्य के निवेश को प्रभावित कर सकते हैं।
सीतारमण ने डिजिटल भुगतान को और अधिक अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के विस्तार के बावजूद कुछ प्रमुख बाजारों में स्थित दुकानें अब भी नकद भुगतान को प्राथमिकता देती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान की सफलता एनपीसीआई (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) के आंकड़ों से स्पष्ट है और उपभोक्ताओं, पेशेवरों तथा कारोबारियों से इसके व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “डिजिटल भुगतान जितना सफल है, आप एनपीसीआई के आंकड़े देख सकते हैं, यह दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय है।”
पहली तिमाही में देश की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर के बारे में पूछे जाने पर सीतारमण ने इसका श्रेय खुद लेने के बजाय नागरिकों, उद्योग और छोटे एवं मझोले उद्यमों के प्रयासों को दिया।
उन्होंने साथ ही आगाह किया कि वैश्विक आर्थिक माहौल अब भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने शुल्क संबंधी खतरों, जारी युद्धों, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी जटिलताओं तथा कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “शुल्क संबंधी खतरे हैं, जारी युद्धों, होर्मुज एक बड़ी जटिलता है, कच्चा तेल एवं उर्वरक हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और देश के सबसे बड़े आयात में शामिल हैं, इसलिए ये अब भी चुनौती बने हुए हैं।”
इन चुनौतियों के बावजूद सीतारमण ने कहा कि सरकार द्वारा लाई गई निश्चितता के कारण भारत बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कारोबारियों से भरोसा बनाए रखने तथा निवेश और विस्तार जारी रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “दुनिया में इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारत कहीं बेहतर स्थिति में है।”
विदेशी निवेश पर उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से ज्यादातर क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाई गई है और अब बड़ी मात्रा में निवेश स्वत: मंजूर मार्ग से आता है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी कारणों से कुछ मामलों में सरकारी मंजूरी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक ‘चीन प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत को तेजी से अपने विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र पर सीतारमण ने कहा कि शोध एवं नवाचार के लिए कर के मामले में उदार रुख अपनाया जाना चाहिए, जबकि व्यावसायिक गतिविधियों को उचित रूप से कर के दायरे में लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर आप अंतरिक्ष को बेहतर ढंग से समझने, अंतरिक्ष तक पहुंचने, अंतरिक्ष यान को भेजने और ऐसी अन्य चीजों से जुड़े शोध की बात कर रहे हैं, तो मैं उस पर कर लगाने के मामले में काफी उदार रहूंगी।”
सीतारमण ने कहा कि कर नीति को अंततः भारत के विकास के लक्ष्यों का समर्थन करना चाहिए और साथ ही उसे विश्वसनीय तथा आर्थिक गतिविधियों के अनुकूल होना चाहिए।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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