चाय बागान मालिक मजदूरों को जमीन देने से इनकार करेंगे तो उनकी सहायता रद्द की जा सकती है: शर्मा

चाय बागान मालिक मजदूरों को जमीन देने से इनकार करेंगे तो उनकी सहायता रद्द की जा सकती है: शर्मा

चाय बागान मालिक मजदूरों को जमीन देने से इनकार करेंगे तो उनकी सहायता रद्द की जा सकती है: शर्मा
Modified Date: January 1, 2026 / 10:32 pm IST
Published Date: January 1, 2026 10:32 pm IST

गुवाहाटी, एक जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को चाय बागान मालिकों को चेतावनी दी कि अगर वे अपने मजदूरों को जमीन का अधिकार देने से इनकार करते हैं, तो सरकार उनकी मिलने वाली सहायता वापस ले सकती है।

मुख्यमंत्री ने ‘नतुन दिनेर आलाप’ कार्यक्रम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार ने नवंबर के विधानसभा शीतकालीन सत्र में चाय बागानों के मजदूरों को घर और जमीन का मालिकाना हक देने के लिए कानून बनाया था।

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शर्मा ने कहा, “चाय बागान मालिकों की प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक नहीं है। जो लोग इस मामले में सरकार के साथ सहयोग नहीं करेंगे, उनकी सहायता वापस ले ली जाएगी।”

उन्होंने बताया कि सरकार हर साल बागानों को करीब 150 करोड़ रुपये देती है और अगर मालिक अदालत जाने या रास्ते में अड़चन डालने की कोशिश करेंगे तो सरकार इस पर फिर से विचार करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “चाय उद्योग के 200 साल बाद अब मजदूरों का अधिकार है कि उन्हें अपनी जमीन का पूरा मालिकाना हक मिले।”

उन्होंने दावा किया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मजदूरों को उनका हक मिलेगा।

शर्मा ने कहा कि ‘असम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑफ लैंड होल्डिंग्स (संशोधन) कानून, 2025’ का उद्देश्य अन्याय को सुधारना है। यह कानून उन मजदूरों को जमीन का अधिकार देने के लिए बनाया गया है, जो पिछले 200 सालों से चाय बागानों में काम कर रहे हैं।

कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इस फैसले पर संदेह जताया और सवाल उठाया कि चुनाव से सिर्फ चार महीने पहले यह कानून क्यों लाया गया।

भाषा राजेश योगेश रमण

रमण


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