नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पर टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही।
गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ की तरह है और देश दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ता रहा है।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘नकारात्मक बातें करने वाले लोग कुछ भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं,… किसी पूर्व वित्त सचिव या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल कर लें, जो दोनों ही उचित कारणों से भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।’’
गोयल ने कहा, ‘‘वे सेब की तुलना सेब से करना भी नहीं जानते। वे पुरानी श्रृंखला की वृद्धि दर की तुलना नई श्रृंखला से करके भारत की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।’’
उन्होंने कहा कि आलोचक वृद्धि के आंकड़ों में कमियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि ‘‘ठीक है, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन रोजगार कहां हैं?’’
गोयल ने कहा कि खासकर कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग मजबूत है। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग से अधिक श्रमिकों की मांग का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘तिरुपुर में एक लाख लोग भेज दीजिए, हम उन्हें काम देंगे।’’
उन्होंने कहा कि नकारात्मक बातें करने वाले लोग इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि अब ‘वे खुद ही बेरोजगार बचे हैं।’
गोयल ने कहा, ‘‘और उनके पास बचा एकमात्र संभावित काम टेलीविजन परिचर्चा में बैठकर कोई तर्क गढ़ना या मनगढ़ंत बात तैयार करना है।’’
गर्ग ने कहा था कि यदि पिछले वर्ष के जीडीपी के आंकड़े को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया गया होता, तो मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत होती।
उन्होंने यह भी कहा था कि सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता और हर महीने तथा हर तिमाही होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था वर्षों से मौजूद है।
गोयल ने कहा, ‘‘हम राजनेता, मंत्री और सांसद ये आंकड़े तैयार नहीं करते। जब आप (विपक्षी नेताओं की ओर इशारा करते हुए) इतनी नकारात्मक सोच के साथ सामने आते हैं, तो एक तरह से आप खुद को ही छोटा कर रहे होते हैं।’’
भाषा रमण अजय
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