ईरान युद्ध से मराठवाड़ा से हल्दी का निर्यात रुका, घरेलू बाज़ार में कीमतें गिरीं
ईरान युद्ध से मराठवाड़ा से हल्दी का निर्यात रुका, घरेलू बाज़ार में कीमतें गिरीं
छत्रपति संभाजीनगर, 24 मार्च (भाषा) अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके से हल्दी का निर्यात रुक गया है, जिससे घरेलू बाज़ार में कीमतें 16,500 रुपये से गिरकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं।
शिवसेना के एमएलसी हेमंत पाटिल ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली हल्दी खाड़ी और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है, लेकिन पिछले महीने शुरू हुए युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह से रुक गया है।
हल्दी एक नकदी फसल है, जिसकी खेती हिंगोली ज़िले में लगभग दो लाख एकड़ ज़मीन पर की जाती है। यहां की ‘वासमत’ किस्म को 2024 में ‘भौगोलिक पहचान’ (जीआई) का दर्जा भी मिला है।
पाटिल ने बताया कि हिंगोली और आसपास के इलाकों से हल्दी के कंटेनर प्रसंस्करण के बाद तमिलनाडु और केरल के रास्ते देश से बाहर भेजे जाते हैं। पाटिल हिंगोली में स्थित ‘बालासाहेब ठाकरे हल्दी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र’ के प्रमुख भी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हिंगोली, नांदेड़, वर्धा, परभणी, यवतमाल और वाशिम मराठवाड़ा के प्रमुख हल्दी उत्पादक ज़िले हैं। इन ज़िलों में हल्दी की कुल पैदावार लगभग 25 लाख टन होती है। अकेले हिंगोली ज़िले में ही हल्दी की खेती लगभग दो लाख हेक्टेयर ज़मीन पर की जाती है।’’
हिंगोली के एक हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि ईरान युद्ध के कारण न केवल हल्दी का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है, बल्कि घरेलू बाज़ार में भी इसकी कीमतों पर बुरा असर पड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध शुरू होने से पहले हल्दी 16,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही थी। अब इसकी कीमत गिरकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है। अगर युद्ध जारी रहा, तो कीमतें और भी नीचे गिर सकती हैं।’’
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 34 करोड़ 15.4 लाख डॉलर मूल्य की हल्दी का निर्यात किया, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र का योगदान 15 करोड़ 53.5 लाख डॉलर रहा।
भारत से हल्दी का निर्यात बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, मलेशिया और मोरक्को जैसे देशों में किया गया।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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