नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का सुझाव, यूपीआई पर कुछ और साल शुल्क नहीं लेना चाहिए

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का सुझाव, यूपीआई पर कुछ और साल शुल्क नहीं लेना चाहिए

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का सुझाव, यूपीआई पर कुछ और साल शुल्क नहीं लेना चाहिए
Modified Date: September 21, 2026 / 03:23 pm IST
Published Date: September 21, 2026 3:23 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को सरकार को सुझाव दिया कि उसे कम से कम कुछ और वर्षों तक यूपीआई लेनदेन पर शून्य शुल्क की व्यवस्था जारी रखनी चाहिए और उसके बाद इसकी समीक्षा करनी चाहिए।

कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा कि वह किसी भी मूल्य के यूपीआई लेनदेन के लिए कारोबारियों से शुल्क लेने के पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को यूपीआई को व्यापक सकारात्मक प्रभाव वाला सार्वजनिक उपक्रम मानना चाहिए।

कुमार ने कहा, ‘‘इसके कुल लाभ सार्वजनिक कोष पर यूपीआई बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए पड़ने वाली 20,000 करोड़ रुपये की लागत से कहीं अधिक हैं।’’

कुमार ने कहा, ‘‘इसलिए, कम से कम कुछ और वर्षों तक यूपीआई लेनदेन पर शून्य शुल्क जारी रखना चाहिए, जब तक कि मुद्रा से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में कुछ गिरावट का रुख दिखाई न दे। उसके बाद स्थिति की समीक्षा की जा सकती है।’’

कुमार ने कहा, ‘‘यह कदम नकदी के इस्तेमाल की ओर वापस लौटने की बहुत बड़ी संभावना पैदा करता है। छोटे से शुल्क से भी इस प्रतिगामी व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा।’’

कुमार ने कहा, ‘‘फिलहाल अच्छी व्यवस्था को जारी रखने के लिए यथास्थिति बनाए रखना बेहतर होगा।’’

सरकार ने करीब छह साल तक पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहे यूपीआई भुगतान में बदलाव करते हुए 15 सितंबर को घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर से इस मंच के जरिये कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन और छोटे भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, ‘‘यूपीआई के जरिये ऐसे भुगतान करने पर ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।’’

मंत्रालय ने कहा था कि एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) कारोबारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है और यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं लगाया जाएगा।

मंत्रालय ने यह भी कहा था कि व्यक्तियों के लिए यूपीआई का उपयोग ‘बिना किसी मासिक सीमा, मात्रा संबंधी प्रतिबंध या शुल्क-मुक्त लेनदेन पर किसी स्तर की सीमा के बिना जारी रहेगा।

इस फैसले की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि यह अमेरिकी दबाव के आगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक बार फिर आत्मसमर्पण करने की कार्रवाई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ‘फर्जी खबर’ फैलाने का आरोप लगाया था और कहा था कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एमडीआर शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।

भाषा योगेश अजय

अजय


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